Bhopal News : भोपाल। मध्य प्रदेश एटीएस (ATS) की गिरफ्त में आए संदिग्ध मोहम्मद फराज से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज पाकिस्तान से जुड़े व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के संपर्क में था और उसे देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था।
छह साल पहले आया कट्टरपंथी नेटवर्क के संपर्क में
जानकारी के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया है कि करीब छह साल पहले फराज की पहचान देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला से हुई थी। नईम ने ही उसका परिचय एक पाकिस्तानी हैंडलर से कराया था। इसके बाद वह धीरे-धीरे ऑनलाइन ग्रुप्स के जरिए कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़ता चला गया।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा था
जांच में पता चला है कि फराज कई ऐसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स का हिस्सा था, जिनमें पाकिस्तान, भारत और अन्य देशों के लोग जुड़े हुए थे। इन ग्रुप्स में कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री साझा की जाती थी और युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। टारगेट किलिंग के लिए किया जा रहा था तैयार
एटीएस सूत्रों के मुताबिक फराज को समय पर टारगेट किलिंग जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए तैयार किया जा रहा था। उसे कुछ कट्टरपंथी व्यक्तियों का उदाहरण देकर उनके जैसा बनने के लिए प्रेरित किया गया था।
पासपोर्ट बनवाने और विदेश जाने की दी गई सलाह
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ग्रुप से जुड़े युवाओं को पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा गया था। जांच एजेंसियों को शक है कि उन्हें विदेश भेजकर प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही थी। इसके लिए कथित तौर पर कुछ वीडियो और अन्य सामग्री भी साझा की गई थी।
एटीएस को आरोपी के पास से कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री भी मिली है। एजेंसियां जब्त किए गए मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
जांच में सामने आए नामों के आधार पर एटीएस अब नईम अब्दुल्ला की तलाश कर रही है। उसके खिलाफ पहले से भी मामला दर्ज बताया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। फिलहाल मोहम्मद फराज एटीएस की रिमांड पर है। जांच एजेंसियां उससे लगातार पूछताछ कर रही हैं और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।