MP News : भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार रिमझिम बारिश ने किसानों के चेहरे पर मायूसी बिखेर दी है। खेतों में खड़ी हजारों बीघा धान की फसल पानी में डूबकर सड़ने लगी है। सबसे ज्यादा नुकसान ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले गोहद क्षेत्र में हुआ है। किसानों का कहना है कि कटाई का मौसम आ गया था, लेकिन बारिश ने सब बर्बाद कर दिया।
भिंड के गोहद, लहार, आलमपुर और दबोह क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से रुक-रुककर बारिश जारी है। इससे धान की फसल जलमग्न हो गई। खासकर गोहद तहसील में स्थिति चिंताजनक है। यह इलाका धान उत्पादन का केंद्र है। यहां के खेतों में पानी भर गया। फसलें गिर गईं। सड़न लगने लगी।
कृषि विभाग के एसडीओ रमेश भदौरिया ने बताया कि गोहद क्षेत्र में 22 से 23 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान बोया था। अधिकांश खेत अब पानी में डूबे हैं। अति वर्षा से भारी क्षति हुई। नुकसान आंकने के निर्देश जारी।
बारिश थमने के बाद सर्वे शुरू होगा। एसडीओ ने कहा कि किसानों को जल्द मुआवजा मिलेगा। लेकिन किसान चिंतित हैं। सर्वा गांव के धर्मेंद्र सिंह ने बताया, “खाद के लिए घंटों लाइन में लगे। इंतजाम किया। अब सब पानी में बह गया।”
राय की पाली के ओमवीर सिंह तोमर, जस्तपुरा के गजेंद्र सिंह तोमर, नोनेरा के रमेश सिंह तोमर और तुकेड़ा के विशाल भदौरिया ने कहा कि फसल पूरी तरह बर्बाद। खेतों में सिर्फ पानी और सड़ी फसल पड़ी है। उत्पादन 30-40 प्रतिशत कम हो सकता है।
बारिश ने सरसों की बुवाई भी चौपट कर दी। कई किसानों ने खाद-बीज खेतों में डाल दिए थे। लेकिन अब पानी ने सब बर्बाद कर दिया। किसान बोले, “रबी सीजन की तैयारी रुक गई। कर्ज चुकाना मुश्किल।”
गोहद एसडीएम राजन बी. नाडिया ने राजस्व अमले को फसल क्षति का सर्वे करने के आदेश दिए। पटवारियों को अपने क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार करने को कहा। जिला प्रशासन ने मुआवजे के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी की।
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मौसम विभाग के अनुसार, हिंद महासागर में बने चक्रवात के कारण यह बारिश हो रही। 29 नवंबर तक हल्की बूंदाबांदी जारी रह सकती है। किसानों को सलाह दी गई कि खेतों में जल निकासी करें। फसल को सुखाने की कोशिश करें। लेकिन नुकसान अपूरणीय लग रहा।