Bhopal Central Jail suicide : भोपाल सेंट्रल जेल में आजीवन कैदी ने लगाई फांसी, गौशाला में मिला शव

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Bhopal Central Jail suicide : भोपाल।  भोपाल सेंट्रल जेल में रविवार शाम एक बंदी ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। बंदी का शव जेल परिसर स्थित गौशाला में पेड़ से लटका हुआ मिला। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आजीवन कारावास की सजा काट रहा था बंदी पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान गुड्डू आदिवासी (58) के रूप में हुई है, जो रायसेन जिले के बाड़ी का रहने वाला था। वह वर्ष 2017 से हत्या के मामले में सजा काट रहा था और जेल में गौसेवक के रूप में कार्य करता था। Bhopal Congress protest : भोपाल में कांग्रेस का बड़ा सत्याग्रह, 23 अप्रैल को किसानों के लिए उपवास पंप बंद करने भेजा, फिर नहीं लौटा रविवार को वह अन्य बंदियों के साथ गौशाला में काम करने गया था। दिनभर उसने सामान्य रूप से काम किया, यहां तक कि ट्रैक्टर भी चलाया। शाम करीब 5:30 बजे लौटते समय पानी का पंप खुला रह जाने पर प्रहरी ने उसे बंद करने के लिए वापस भेजा, लेकिन वह काफी देर तक वापस नहीं लौटा। प्रहरी ने देखा फंदे पर लटका शव जब बंदी काफी देर तक नहीं लौटा, तो प्रहरी उसे देखने गौशाला पहुंचा। वहां उसने गुड्डू को पेड़ से रस्सी के सहारे फंदे पर लटका हुआ पाया। बताया जा रहा है कि उसने गायों को बांधने वाली रस्सी से ही फंदा बनाया था। Gwalior Fraud Delivery Case : 7 आईफोन की जगह पार्सल में मिले पत्थर, डिलीवरी बॉय 3 महीने से लापता मानसिक तनाव की आशंका, जांच जारी प्रारंभिक जांच में पारिवारिक दूरी और मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। यह भी सामने आया है कि मृतक से मिलने उसके परिजन कम ही आते थे और वह कभी पैरोल पर नहीं गया। कुछ सूत्रों के मुताबिक उसका जेल अधिकारियों से विवाद भी चल रहा था। फिलहाल गांधीनगर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतक का शव गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में रखवाया गया है। सोमवार सुबह परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

Bhopal Congress protest : भोपाल में कांग्रेस का बड़ा सत्याग्रह, 23 अप्रैल को किसानों के लिए उपवास

Bhopal Congress protest

Bhopal Congress protest : भोपाल। भोपाल में किसानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस आक्रामक रुख अपनाने जा रही है। किसानों को डिफाल्टर घोषित किए जाने और गेहूं की खरीदी नहीं होने के विरोध में कांग्रेस सेवादल 23 अप्रैल को सत्याग्रह करेगा। रोशनपुरा चौराहे पर होगा उपवास राजधानी के रोशनपुरा चौराहे पर आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता पूरे दिन उपवास पर बैठेंगे। इसे किसानों के समर्थन में बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। Gwalior Fraud Delivery Case : 7 आईफोन की जगह पार्सल में मिले पत्थर, डिलीवरी बॉय 3 महीने से लापता किसानों के साथ अन्याय का आरोप कांग्रेस का कहना है कि किसानों को डिफाल्टर घोषित करना उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर रहा है। साथ ही, समय पर गेहूं की खरीदी न होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वरिष्ठ नेता होंगे शामिल इस सत्याग्रह में मध्यप्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल होंगे। पार्टी इसे किसानों के हक की लड़ाई बताते हुए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रही है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। Wildlife Water Crisis MP : बैतूल में गर्मी से वन्यजीवों पर संकट, पानी के लिए भटक रहे जानवर; सामाजिक संगठन ने शुरू की पहल

AWS weather station : MP में मौसम का “Live Update”, हर गांव बनेगा मिनी वेदर स्टेशन

AWS weather station

AWS weather station : मध्यप्रदेश।  मध्यप्रदेश में अब खेती-किसानी और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश की सभी 23,634 ग्राम पंचायतों में ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) और 444 तहसीलों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) लगाने की बड़ी योजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत कृषि विभाग ने निविदा जारी कर कार्यान्वयन भागीदारों (WIP) से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस सिस्टम की खास बात यह है कि मौसम और बारिश से जुड़ा डेटा हर 15 मिनट में सीधे सरकारी पोर्टल पर अपडेट होगा, जिससे सूखा और अतिवृष्टि जैसी स्थितियों की रियल-टाइम निगरानी संभव हो सकेगी। Gwalior Fraud Delivery Case : 7 आईफोन की जगह पार्सल में मिले पत्थर, डिलीवरी बॉय 3 महीने से लापता परियोजना की लागत और बजट यह महत्वाकांक्षी योजना केंद्र और राज्य सरकार के साझा सहयोग से लागू की जा रही है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, एक ऑटोमैटिक रेन गेज लगाने में लगभग ₹35,000 से ₹40,000 का खर्च आएगा, जबकि एक वेदर स्टेशन की लागत ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक होगी। पूरे प्रदेश में 24,000 से अधिक लोकेशनों को कवर करने के लिए इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹100 करोड़ से ₹120 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसमें केंद्र सरकार 50% राशि ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) के तहत देगी, जबकि शेष खर्च राज्य सरकार और चयनित एजेंसियां मिलकर वहन करेंगी। क्यों जरूरी है यह योजना? फिलहाल मौसम की जानकारी जिला या ब्लॉक स्तर तक सीमित है, जिससे गांव स्तर पर होने वाली प्राकृतिक घटनाओं का सटीक आकलन नहीं हो पाता। कई बार एक ही तहसील में अलग-अलग गांवों में मौसम की स्थिति बिल्कुल अलग होती है—कहीं अतिवृष्टि तो कहीं सूखा। इस डेटा की कमी के चलते प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों के नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाता और मुआवजे में देरी होती है। नई व्यवस्था से हर पंचायत का अलग डेटा उपलब्ध होगा, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा मिल सकेगा। MP TET Protest : भोपाल में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, TET अनिवार्यता के खिलाफ ज्ञापन सौंपा, जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी कैसे करेगा काम? यह पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक और सौर ऊर्जा से संचालित होगा। पंचायतों में लगे रेन गेज और तहसीलों में स्थापित वेदर स्टेशन में आधुनिक सेंसर और सिम आधारित टेलीमेट्री सिस्टम होगा। ये उपकरण हर 15 मिनट में बारिश, तापमान, हवा की गति और नमी जैसे आंकड़े रिकॉर्ड कर वायरलेस माध्यम से ‘विंड्स’ (WINDS) के केंद्रीय सर्वर पर भेजेंगे। पूरी प्रक्रिया बिना मानवीय हस्तक्षेप के होगी, जिससे डेटा की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। किसानों और आम जनता को क्या फायदा? इस प्रणाली से कृषि विभाग को बेहतर योजना बनाने और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी। किसानों को अपने गांव के अनुसार सटीक मौसम सलाह मिलेगी, जिससे वे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन के सही निर्णय ले सकेंगे। बीमा कंपनियों और किसानों के बीच डेटा को लेकर होने वाले विवाद भी खत्म होंगे, क्योंकि अब भुगतान का आधार गांव स्तर का प्रमाणिक डेटा होगा। इसके अलावा, आम नागरिकों को आकाशीय बिजली, भारी बारिश या बाढ़ जैसी घटनाओं की समय रहते चेतावनी मिल सकेगी, जिससे नुकसान कम किया जा सकेगा। Wildlife Water Crisis MP : बैतूल में गर्मी से वन्यजीवों पर संकट, पानी के लिए भटक रहे जानवर; सामाजिक संगठन ने शुरू की पहल कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट? सरकार ने इस योजना को तय समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अप्रैल 2026 में टेंडर जारी होने के बाद, चयनित कंपनियों को वर्क ऑर्डर मिलने से 6 से 9 महीने के भीतर सभी 444 तहसीलों और 23,634 ग्राम पंचायतों में उपकरण स्थापित करने होंगे। इसके साथ ही, अगले 5 वर्षों तक इन उपकरणों का रखरखाव और संचालन भी संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी होगी, ताकि डेटा लगातार और बिना रुकावट के उपलब्ध होता रहे।