NGT order Bhopal : भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भोपाल में पेड़ों के संरक्षण को लेकर सख्त आदेश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक अब सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों के चारों ओर कम से कम 1 मीटर की जगह खुली रखना अनिवार्य होगा और कंक्रीट हटाया जाएगा।
पेड़ों की जड़ों तक हवा-पानी पहुंचाने पर जोर
NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने पाया कि बाबूलाल गौर मार्ग और अवधपुरी क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट कर दिया गया था, जिससे जड़ों तक हवा और पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। इससे पेड़ों की वृद्धि प्रभावित हो रही थी।
पर्यावरण और स्वास्थ्य का मुद्दा
ट्रिब्यूनल ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण में जीवन जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। अत्यधिक कंक्रीटकरण से भूजल रिचार्ज कम होता है और तापमान बढ़ने के साथ पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ता है।
सरकार और एजेंसियों को निर्देश
NGT ने शहरी विकास विभाग और भोपाल नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि:
- पेड़ों के चारों ओर 1 मीटर खुली मिट्टी सुनिश्चित की जाए
- पेड़ों पर लगे बोर्ड, विज्ञापन और बिजली के तार हटाए जाएं
- पेड़ों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं
- ट्री डिजीज सर्जरी यूनिट स्थापित करने पर विचार किया जाए
लहारपुर डैम में सीवेज पर सख्ती
एक अन्य मामले में NGT ने लहारपुर डैम में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह पर सख्त नाराजगी जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, बाग मुगालिया क्षेत्र से नालों का गंदा पानी सीधे डैम में पहुंच रहा था, जिससे पानी प्रदूषित हो गया है।
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स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा
डैम का दूषित पानी करीब 2,500 एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई के लिए उपयोग हो रहा है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। निरीक्षण में पानी काला, दुर्गंधयुक्त और झागयुक्त पाया गया।
NGT के सख्त निर्देश
ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि:
- डैम में गिरने वाले सभी नालों की पहचान कर सीवेज का प्रवाह तुरंत रोका जाए
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या वैकल्पिक उपचार प्रणाली स्थापित की जाए
- डैम के आसपास हरित पट्टी विकसित की जाए
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जनजागरूकता अभियान चलाया जाए
- जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी कर उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए