Cheetah project MP : मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के मंदसौर-नीमच स्थित गांधी सागर अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण की एक अहम उपलब्धि सामने आई है। यहां पुनर्वासित किए गए दो चीते ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने अपने प्रवास का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
सीएम की मौजूदगी में हुआ था पुनर्वास
इन दोनों चीतों को चीता प्रोजेक्ट के तहत 20 अप्रैल 2025 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अभयारण्य में छोड़ा गया था। यह कदम प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
नए माहौल में सफलतापूर्वक अनुकूलन
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने नए वातावरण में खुद को पूरी तरह ढाल लिया है। दोनों चीते स्वस्थ हैं और उनकी गतिविधियों में प्राकृतिक व्यवहार साफ नजर आ रहा है, जो इस परियोजना की सफलता का संकेत है।
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24 घंटे हाईटेक निगरानी
वन विभाग द्वारा दोनों चीतों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। GPS कॉलर और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए उनके मूवमेंट, स्वास्थ्य और शिकार गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों की टीम नियमित रूप से डेटा का विश्लेषण कर रही है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए मील का पत्थर
विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों का एक वर्ष पूरा करना मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल जैव विविधता को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य की पुनर्वास परियोजनाओं के लिए भी एक मजबूत मॉडल बन सकता है।
स्थायी आवास बनने की उम्मीद
वन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में ‘प्रभास’ और ‘पावक’ गांधी सागर अभयारण्य में स्थायी रूप से बस जाएंगे और यह क्षेत्र चीतों के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित होगा।
चीतों का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करना पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इससे राज्य को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।