MP TET controversy : मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करते हुए पहले दिए गए निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। इस कदम के बाद प्रदेश के शिक्षकों में राहत और उम्मीद की भावना देखने को मिल रही है।
सुप्रीम कोर्ट में ई-फाइलिंग से याचिका दाखिल
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने 17 अप्रैल की शाम ई-फाइलिंग के जरिए यह रिव्यू पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। इसकी आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी है। सरकार के इस कदम को मामले को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
Heatwave Alert : नर्मदापुरम में भीषण गर्मी का असर, स्कूलों का समय बदला; हीट वेव का यलो अलर्ट जारी
मुख्यमंत्री की पहले की बैठक का असर
इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकारात्मक संकेत दिए थे। अब रिव्यू पिटीशन दाखिल होने के बाद यह साफ है कि सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता दे रही है और शिक्षकों के हित में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
शिक्षक संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले पर शिक्षक संगठनों की अलग-अलग राय सामने आई है।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इसे जरूरी कदम बताया है, लेकिन साथ ही कहा है कि इससे शिक्षकों की मूल समस्याएं अभी पूरी तरह हल नहीं हुई हैं। संगठन का कहना है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब TET को लेकर दबाव बनाना उचित नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, मप्र शिक्षक संघ ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और इसे शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में सकारात्मक पहल बताया है।
Sehore SBI bank fire : सीहोर SBI बैंक में AC कंप्रेसर में लगी आग, स्टाफ की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
सेवा अवधि गणना बना मुख्य मुद्दा
इस पूरे विवाद में सबसे अहम मुद्दा सेवा अवधि की गणना का है। शिक्षक संगठनों की मांग है कि सेवा की गणना पहली नियुक्ति तिथि से की जाए। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा को नजरअंदाज करने से शिक्षकों को आर्थिक नुकसान और पदोन्नति में परेशानी झेलनी पड़ी है।
आदेश स्थगित करने की मांग
शिक्षक संगठनों ने यह भी मांग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक TET से जुड़े आदेशों को स्थगित रखा जाए। उनका मानना है कि इससे शिक्षकों के बीच फैली अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति खत्म हो सकेगी।