उन्होंने कहा कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है। वहां पूजा होगी या इबादत, यह पूरी तरह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उन्होंने समाज में शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हिंदू-मुस्लिम के नाम पर तनाव बढ़ाना ठीक नहीं है।
“ASI रिपोर्ट में मंदिर होने का उल्लेख नहीं”
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उमा भारती के शासनकाल में कोर्ट में पेश ASI रिपोर्ट में मंदिर होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले थे। उन्होंने कहा कि उस रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि भोजशाला मंदिर थी।
उन्होंने यह भी कहा कि ASI के नियमों के तहत संरक्षित स्मारकों में पूजा-पाठ को लेकर कानूनी प्रक्रिया तय होती है और मामले को उसी आधार पर देखा जाना चाहिए।
ज्ञानवापी और मथुरा विवाद का भी किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने भोजशाला विवाद की तुलना देश के अन्य धार्मिक विवादों से भी की। उन्होंने वाराणसी के ज्ञानवापी, संभल मस्जिद और मथुरा-वृंदावन से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कई विवाद फिलहाल अदालतों में लंबित हैं।
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इंदौर में भी फैसले पर उठाए थे सवाल
हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदौर में भी दिग्विजय सिंह ने भोजशाला मामले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि ASI को वहां मंदिर होने के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि हाईकोर्ट का पुराना आदेश स्पष्ट नहीं था।
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार
दिग्विजय सिंह के बयान पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा—
“राजा साहब आपको आपके खुदा की कसम, कभी भविष्य में भोजशाला में मां वागेश्वरी के दर्शन करने तो नहीं जाएंगे?”
रामेश्वर शर्मा ने अयोध्या मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह ने पहले श्रीराम जन्मभूमि फैसले पर भी सवाल उठाए थे, लेकिन बाद में अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम के दर्शन किए थे।
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