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Pipariya embezzlement case : छात्रवृत्ति-एरियर्स घोटाले में ऑपरेटर ने रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर, जेडी ने बीईओ को दी धमकी

Pipariya embezzlement case

Pipariya Embezzlement Case : नर्मदापुरम। पिपरिया ब्लॉक में शिक्षकों के एरियर्स और छात्रवृत्ति राशि में हुए 9 लाख रुपये के गबन के मामले में डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज न होने पर लोक शिक्षण संयुक्त संचालक (जेडी) मनीष वर्मा ने 9 दिसंबर को थाने को नया पत्र लिखा। पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और दायित्वों में लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।

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ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) एसएल रघुवंशी ने बताया कि हमने 2 मई 2025 को सभी दस्तावेज मंगलवारा थाना प्रभारी को सौंप दिए थे। लेकिन थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी का कहना है कि उन्हें बीईओ कार्यालय से अब तक कोई पत्र या दस्तावेज नहीं मिला। इस विरोधाभास ने अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ये है गबन का पूरा मामला

जांच के अनुसार, 2018 से 2024 तक पिपरिया ब्लॉक में डाटा एंट्री ऑपरेटर कमलेश कुमार अहिरवार ने शिक्षकों के एरियर्स और छात्रवृत्ति राशि में कुल 24 लाख रुपये का गबन किया। इसमें से ट्रेजरी शाखा ने 9,48,000 रुपये की पुष्टि की।

अहिरवार ने अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में फर्जी ट्रांसफर किए। अगस्त 2024 में एक ही खाते में बार-बार राशि जाने पर ट्रेजरी ने शक किया और मामला पकड़ा गया।

ऑपरेटर ने जांच के दौरान कुछ राशि लौटा दी और गलती स्वीकार की लेकिन एफआईआर अब तक दर्ज नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, अहिरवार के पास मामले से जुड़े साक्ष्य हैं, जो नए नाम उजागर कर सकते हैं।

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तीन आदेशों के बावजूद FIR अटकी

कलेक्टर कार्यालय और जेडी ने 7 मार्च 2025 को पहला आदेश जारी किया। इसके बाद 24 अक्टूबर और 9 दिसंबर 2025 को दोबारा निर्देश दिए गए। फिर भी मंगलवारा थाने में शुक्रवार तक कोई दस्तावेज नहीं पहुंचा।

पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी जांच के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारण बताकर हाजिर नहीं हुए। अब 15 दिसंबर को वर्तमान बीईओ और सेवा निवृत्त क्लर्क अनिल कुमार अग्रवाल को जांच समिति के सामने पेश होना है।

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बीईओ रघुवंशी ने कहा, “वरिष्ठों के निर्देश पर मार्च और मई में पत्र लिखकर दस्तावेज भेजे थे। एफआईआर में देरी हमारी नहीं है।” वहीं, थाना प्रभारी त्रिपाठी ने पुष्टि की कि उन्हें कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला।

अधिकारियों पर सवाल

इस गबन के दौरान दो पूर्व बीईओ और वर्तमान बीईओ पदस्थ रहे। विभाग ने तीनों के बयान लिए हैं और विभागीय जांच चल रही है। जेडी वर्मा का पत्र बीईओ कार्यालय को भी चेतावनी देता है। शिक्षा विभाग में ऐसी लापरवाही से सरकारी योजनाओं पर असर पड़ रहा है। अब 15 दिसंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

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