महिला की सेहत और अधिकार सर्वोपरि
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि महिला की शारीरिक और मानसिक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों में जबरन गर्भ जारी रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
पीड़िता दिव्यांग है और सुनने-बोलने में असमर्थ है, जिससे उसकी स्थिति और अधिक संवेदनशील मानी गई।
11 अप्रैल को होगी प्रक्रिया
कोर्ट के निर्देशानुसार गर्भपात की प्रक्रिया 11 अप्रैल को कराई जाएगी। पूरी प्रक्रिया मेडिकल विशेषज्ञों की निगरानी में सुरक्षित तरीके से संपन्न कराई जाएगी।
भाई ने दायर की थी याचिका
मामले में पीड़िता की ओर से उसके भाई ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि गर्भावस्था यौन शोषण का परिणाम है, जिससे महिला को गंभीर मानसिक और शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।
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डॉक्टरों की विशेष टीम गठित करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि अनुभवी डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई जाए। इस टीम में मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, ताकि प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम न रहे।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट बनी आधार
कोर्ट के निर्देश पर गजराराजा मेडिकल कॉलेज और कमलाराजा अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच की।
रिपोर्ट में गर्भ लगभग 19 सप्ताह का पाया गया और विशेषज्ञों ने आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के साथ सुरक्षित गर्भपात संभव बताया।