MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश सहित देशभर में आयुर्वेद डॉक्टरों के दो बड़े मुद्दे नए साल में केंद्र और राज्य सरकारों के लिए गले की फांस बन सकते हैं। पहला मुद्दा इमरजेंसी में आयुर्वेद डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं प्रिस्क्राइब करने और सर्जरी का अधिकार देना है। दूसरा 2027 से बीएएमएस छात्रों के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT) अनिवार्य करना है।
आयुष मेडिकल एसोसिएशन (AMA) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कई राज्यों में आयुर्वेद डॉक्टरों को ये अधिकार मिले हैं, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में नहीं। इससे करीब 5 लाख आयुर्वेद डॉक्टर और 2 लाख छात्र प्रभावित हैं।
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इमरजेंसी में एलोपैथिक दवा और सर्जरी का अधिकार
उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में आयुर्वेद डॉक्टरों को इमरजेंसी में एलोपैथिक दवाएं देने की अनुमति है। लेकिन मध्य प्रदेश में यह अधिकार नहीं है। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीण और सुदूर इलाकों में एमबीबीएस से ज्यादा आयुर्वेद डॉक्टर सेवा दे रहे हैं।
मरीजों की जान बचाने के लिए उन्हें एलोपैथिक दवाएं प्रिस्क्राइब करने का हक मिलना चाहिए। सुश्रुत संहिता में 300 से ज्यादा सर्जिकल प्रक्रियाएं और प्लास्टिक सर्जरी का जिक्र है, जो आयुर्वेद में सर्जरी की प्राचीनता दिखाता है। NCISM ने 2020 में सर्जरी की अनुमति दी थी, लेकिन IMA का विरोध जारी है।
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NEXT परीक्षा की अनिवार्यता पर विवाद
2027 से बीएएमएस 2021-22 बैच के छात्रों के लिए NEXT पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे देशभर के 600 से ज्यादा कॉलेजों के 1.5-2 लाख छात्र प्रभावित होंगे। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि एमबीबीएस छात्रों के लिए NEXT 2-3 साल टाल दिया गया, लेकिन आयुर्वेद छात्रों पर क्यों थोपा जा रहा है? यह पक्षपात है। सिलेबस समान होने पर प्रैक्टिस अधिकार भी समान होने चाहिए।
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वर्जन
केंद्र सरकार इमरजेंसी में जनमानस की जान बचाने हेतु मॉर्डन पैथी की दवायें प्रिस्क्राइब करने का अधिकार देने के साथ ही नेशनल एग्जिट टेस्ट आयुर्वेद – आयुष के लिये फिलहॉल टाला जावे। मान. प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलावें।
– डॉ राकेश पाण्डेय, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आयुष मेडिकल एसोसिएशन
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