Trap Cameras Stolen : नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सोहागपुर रेंज में चोरों ने सरकारी संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया। अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के फेज-3 के तहत लगाए गए दो कैमरा ट्रैप महेंद्रवाड़ी बीट के घने जंगल से चोरी हो गए। ये कैमरे बाघों और अन्य वन्यजीवों की गिनती के लिए महत्वपूर्ण थे, लेकिन चोरों की नजर उन पर पड़ गई। घटना का खुलासा रविवार सुबह हुआ, जब बीट गार्ड ने चेकिंग के दौरान कैमरों को गायब पाया। वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और सोमवार शाम को स्थानीय थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया।
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मामला सोहागपुर रेंज के महेंद्रवाड़ी बीट के वन कक्ष संख्या आरएफ-226 का है। बीट गार्ड हेमंत राय ने रविवार सुबह करीब 7 बजे नियमित गश्त के दौरान निर्धारित स्थान पर पहुंचे। वहां पेड़ों पर लगे दो कैमरा ट्रैप नजर नहीं आए। आसपास सर्च किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। संदेह हुआ कि कोई चोर इन्हें उखाड़ ले गया है। हेमंत राय ने फौरन अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।
अधिकारियों ने निर्देश दिए कि पूरी घटना की जांच हो और कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके बाद सोमवार शाम को बीट गार्ड ने सोहागपुर थाने पहुंचकर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 303 (चोरी) के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
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पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और जंगल इलाके में लगे अन्य कैमरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त गश्त की योजना बनाई है। इन कैमरों को 15 नवंबर 2025 को लगाया गया था।
अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 का यह तीसरा चरण चल रहा है, जिसमें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के विभिन्न बफर क्षेत्रों जैसे बागड़ा बफर, मढ़ई, चूरना, तवा बफर, बोरी और सामान्य वन मंडल के सोहागपुर रेंज में कुल दर्जनों कैमरा ट्रैप इंस्टॉल किए गए थे। इनका मकसद जंगली जानवरों, खासकर बाघों की सटीक गिनती करना है।
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प्रत्येक कैमरा ट्रैप में मोशन सेंसर लगा होता है, जो जानवरों के गुजरने पर फोटो या वीडियो कैप्चर करता है। ये कैमरे 25 दिनों बाद हटाने थे, ताकि डेटा एनालिसिस हो सके। लेकिन चोरी की वजह से न सिर्फ ये दो कैमरे खराब हुए, बल्कि पूरी गणना प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। वन विभाग को अब इन जगहों पर नए कैमरे लगाने पड़ेंगे, जो समय और संसाधनों की बर्बादी है।
सोहागपुर रेंज के रेंजर सुमित कुमार पांडे ने इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दो सरकारी कैमरा ट्रैप चोरी हुए हैं, जिनकी कीमत हजारों रुपये है। रेंजर ने कहा कि थाने में FIR दर्ज हो चुकी है और पुलिस के साथ मिलकर चोरों की तलाश की जा रही है। उन्होंने जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से अपील की कि ऐसी घटनाओं की जानकारी दें।
रेंजर सुमित पांडे के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब ट्रैप कैमरों की चोरी हुई हो। मध्य प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व जैसे बुरहानपुर और सतपुड़ा के कुछ क्षेत्रों में भी ऐसी वारदातें रिपोर्ट हुई हैं, जहां चोर इन्हें बेचने के इरादे से ले जाते हैं। ये कैमरे बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं, जिससे चोरों को प्रलोभन होता है।
वन विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ गणना जैसे महत्वपूर्ण अभियान को चोरी जैसी छोटी घटनाएं नुकसान पहुंचाती हैं। सतपुड़ा रिजर्व, जो बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है, में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं। विभाग ने अब सिक्योरिटी बढ़ाने का फैसला लिया है, जिसमें रात के समय ज्यादा गश्त और स्थानीय समुदाय की मदद शामिल है।
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पुलिस का अनुमान है कि चोर जंगल के पास बसे गांवों के ही हो सकते हैं। जांच में आसपास के सीसीटीवी और ग्रामीणों के बयान लिए जा रहे हैं। फिलहाल, चोरों का कोई सुराग नहीं मिला है, लेकिन वन और पुलिस विभाग मिलकर सख्ती बरत रहे हैं। यह घटना पूरे क्षेत्र में सतर्कता का संदेश दे रही है कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सबकी जिम्मेदारी है।