Chhath Puja 2025 : छठ पूजा का आज तीसरा दिन है। आज भक्त डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य देंगे। यह पर्व सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा को समर्पित है। सूर्यदेव को जीवन, ऊर्जा और प्रकाश का दाता माना जाता है। छठी मैया को प्रकृति और मातृत्व की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि छठी मैया सूर्यदेव की बहन हैं। इसलिए इस पर्व को सूर्य-षष्ठी व्रत भी कहते हैं।
संध्या अर्घ्य का महत्व
छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देना खास है। हिंदू धर्म में सूर्य को साक्षात देवता माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य शाम को अपनी पत्नी प्रत्युषा के साथ होते हैं। प्रत्युषा को शाम की देवी कहा जाता है। भक्त सूर्य और प्रत्युषा को अर्घ्य देते हैं। यह अर्घ्य दिनभर की रोशनी और ऊर्जा के लिए कृतज्ञता का प्रतीक है। माताएं इस दौरान संतान की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
सूर्य कवच का पाठ
संध्या अर्घ्य से पहले सूर्य कवच का पाठ किया जाता है। यह पाठ स्वास्थ्य, धन और संतान की उन्नति के लिए लाभकारी है। रोजाना सूर्य कवच पढ़ने से आंख, त्वचा, हृदय और हड्डियों की बीमारियां ठीक होती हैं। यह आत्मबल और इच्छाशक्ति को भी बढ़ाता है।
तीन शुभ योग में अर्घ्य
इस बार संध्या अर्घ्य रवि योग में होगा। यह योग सूर्यदेव को समर्पित है। साथ ही, मंगल ग्रह वृश्चिक राशि में गोचर कर रहा है। इससे रूचक राजयोग बन रहा है। गुरु चंद्रमा की राशि में हंस राजयोग भी बना रहे हैं। इन तीन शुभ योगों में अर्घ्य देने से पूजा का महत्व बढ़ गया है। संध्या अर्घ्य का समय शाम 5:40 बजे है।
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अर्घ्य देने की सही विधि
संध्या अर्घ्य पश्चिम दिशा की ओर मुख करके दिया जाता है। तांबे के लोटे में जल भरें। इसमें फूल, अक्षत, रोली, गुड़ और दूध मिलाएं। दोनों हाथों से लोटा ऊपर उठाकर सूर्य की ओर जल धीरे-धीरे डालें। जल गिराते समय सूर्य की किरणें जल के बीच से दिखनी चाहिए। इसे सूर्य दर्शन कहते हैं। जल चढ़ाते समय “ॐ आदित्याय नमः” या “ॐ भास्कराय नमः” मंत्र का जप करें। अर्घ्य के बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें: “जय छठी मैया, जय सूर्य भगवान। संतान सुख, आरोग्य और समृद्धि दें।”