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Transfer Policy : मध्यप्रदेश शिक्षक ट्रांसफर 2026, 19 जून से ऑनलाइन आवेदन शुरू, 3 सख्त नियमों से बढ़ा विवाद

Transfer Policy

Transfer Policy : भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए अब बड़ी खबर सामने आई है। विभाग 19 जून से स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। आवेदन की अंतिम तारीख 23 जून तय की गई है। लेकिन जैसे ही प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी हुई, वैसे ही नए नियमों को लेकर शिक्षकों में नाराज़गी भी तेज हो गई है।

स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बार ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। शिक्षक तय तारीख के भीतर पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। लेकिन समय बहुत कम होने की वजह से कई शिक्षक इसे लेकर चिंता में हैं।

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3 बड़े नियम बने सबसे बड़ी परेशानी

शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस बार की ट्रांसफर नीति काफी सख्त है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक बाहर हो सकते हैं।

1. 90% ई-अटेंडेंस अनिवार्य

नए नियम के मुताबिक, ट्रांसफर के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस जरूरी रखी गई है।
शिक्षकों का कहना है कि कई स्कूलों में नेटवर्क की दिक्कत और तकनीकी समस्याओं के कारण हाजिरी पूरी नहीं हो पाती, जिसका सीधा असर अब ट्रांसफर पर पड़ रहा है।

2. जनगणना ड्यूटी बनी बड़ी रुकावट

प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत शिक्षक इस समय जनगणना कार्य में लगे हुए हैं।
नए नियमों के मुताबिक, जो शिक्षक जनगणना ड्यूटी पर हैं, वे ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। यहां तक कि पहले से जारी ट्रांसफर आदेश भी ड्यूटी के चलते रोक दिए जाएंगे।

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3. 3 साल की सेवा शर्त

एक और बड़ी शर्त यह है कि शिक्षक को कम से कम 3 साल की सेवा पूरी करनी जरूरी है।
जो शिक्षक इस अवधि को पूरा नहीं करते, वे इस प्रक्रिया से बाहर रहेंगे।

शिक्षकों में नाराज़गी, नियमों पर सवाल

शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का कहना है कि इन नियमों की वजह से करीब 95 प्रतिशत शिक्षक इस प्रक्रिया से वंचित रह सकते हैं।

शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से वे पारिवारिक, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कारणों से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन नए नियमों ने राहत की बजाय मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सरकार से नियमों में ढील की मांग

शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी और 3 साल की सेवा जैसी शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि अगर नियमों में ढील नहीं दी गई तो हजारों शिक्षक इस बार भी ट्रांसफर से वंचित रह जाएंगे।

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