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Narmadapuram News : नर्मदापुरम में आदिवासी संगठन का धरना कलेक्टर को बुलाने पर अड़े, फॉरेस्ट एसडीओ पर कार्रवाई की मांग

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Narmadapuram News : नर्मदापुरम।  नर्मदापुरम जिले में मंगलवार को आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनों ने मिलकर बड़ा “जनआक्रोश आंदोलन” शुरू किया है। यह प्रदर्शन पीपल चौक पर किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट गेट तक मार्च और घेराव करने की तैयारी में हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर है।

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आंदोलन क्यों शुरू हुआ?

आदिवासी संगठनों का आरोप है कि वन विभाग में पदस्थ फॉरेस्ट एसडीओ अनिल विश्वकर्मा द्वारा वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ कथित रूप से:

  • अवैध वन कटाई के नाम पर कार्रवाई
  • वनग्रामों के लोगों को परेशान करना
  • वन अधिकार पट्टा धारकों पर दबाव
  • झूठे केस दर्ज करना
  • कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताएं

जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

कौन-कौन संगठन शामिल हैं?

इस आंदोलन में कई आदिवासी और सामाजिक संगठन एक साथ शामिल हुए हैं, जैसे:

  • हमारा गांव संगठन मध्यप्रदेश
  • जय आदिवासी युवा शक्ति
  • आदिवासी युवा मंच
  • किसान आदिवासी संगठन
  • आदिवासी सेवा समिति तिलक सिंदूर
  • आदिवासी विकास परिषद
  • गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

इन सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से इस आंदोलन को समर्थन दिया है।

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प्रशासन से क्या बातचीत हुई?

मौके पर स्थिति संभालने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी पहुंचे, जिनमें शामिल हैं:

  • एडीएम अनिल जैन
  • सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह
  • एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा
  • तहसीलदार सरिता मालवीय
  • कोतवाली टीआई कंचन सिंह ठाकुर

प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लेने और बातचीत शुरू करने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य शर्त यह है कि कलेक्टर और डीएफओ स्वयं मौके पर आकर चर्चा करें, तभी वे आगे की बातचीत करेंगे।

धरने की स्थिति और माहौल

  • पीपल चौक पर सुबह से ही भारी भीड़ जमा
  • मंच बनाकर नारेबाजी और भाषण जारी
  • “न्याय दो”, “भ्रष्टाचार बंद करो” जैसे नारे लगाए गए
  • कलेक्ट्रेट की ओर कूच की तैयारी

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन अनिश्चितकालीन जारी रहेगा।

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सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है:

  • कलेक्ट्रेट गेट पर बैरिकेडिंग लगाई गई
  • पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई
  • अंदर प्रवेश सीमित किया गया
  • किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात

आदिवासी संगठनों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासन को सौंपने की बात कही है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

1. FIR और कार्रवाई

कथित रूप से तीन दिन तक बंधक बनाकर मारपीट, जातिसूचक गालियां और प्रताड़ना देने वाले अधिकारियों पर तुरंत FIR दर्ज की जाए।

2. बर्खास्तगी

मारपीट और कथित अत्याचार में शामिल सभी अधिकारियों को तत्काल पद से हटाया जाए।

3. झूठे केस वापस हों

वन कटाई के मामलों में बिना सबूत लगाए गए केस तुरंत वापस लिए जाएं।

4. मुआवजा और सुरक्षा

पीड़ित आदिवासी परिवारों को मुआवजा और सुरक्षा दी जाए।

5. उच्च स्तरीय जांच

पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए।

6. वन अधिकार पट्टा सुरक्षा

वन अधिकार पट्टा मिलने के बाद किसी भी तरह की जमीन वापसी या परेशान न किया जाए।

7. लंबित मुआवजा

चांदकिया डैम का तीन साल से रुका हुआ मुआवजा तुरंत वितरित किया जाए।

8. वन चौकीदार नियुक्ति

सभी चौकीदारों को नियुक्ति पत्र और मानदेय स्पष्ट रूप से दिया जाए।

9. वन समिति लाभांश जांच

वन समितियों के लाभांश वितरण की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

10. अवैध शराब पर रोक

गांवों में चल रही अवैध शराब बिक्री और सप्लाई को तत्काल रोका जाए। प्रशासन फिलहाल बातचीत के जरिए स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आंदोलनकारी कलेक्टर और डीएफओ की मौजूदगी पर अड़े हुए हैं। अभी तक किसी तरह की हिंसक स्थिति की सूचना नहीं है, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

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