MP Water Crisis : मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ कई जिलों में पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। कहीं महिलाएं सूखी नदी में झिरी खोदकर मटमैला पानी निकाल रही हैं, तो कहीं लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर गंदे कुएं का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं, हैंडपंप सूख चुके हैं और लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
सीहोर में महिलाएं कुओं में उतरने को मजबूर
सीहोर जिले की ग्राम पंचायत रामगढ़ में हालात बेहद खराब हैं। यहां महिलाएं दो किलोमीटर दूर जाकर कुओं में उतरकर पानी भर रही हैं। कई जगह सूखी नदी-नालों में झिरी खोदकर मटमैला पानी निकाला जा रहा है, जिसे कपड़े से छानकर पीने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
रायसेन में सरकारी कुएं पर कब्जे का आरोप
रायसेन के कोकलपुर गांव में करीब 2 हजार की आबादी जल संकट से परेशान है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी कुएं में निजी मोटर पंप लगाकर पानी खींचा जा रहा है, जिससे टंकी तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। लोगों को दिनभर में सिर्फ 3 से 4 कुप्पा पानी मिल रहा है।
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बैतूल में 5 किमी दूर से ला रहे गंदा पानी
भैंसदेही तहसील के हरिमऊ गांव में नल-जल योजना बंद पड़ी है और दो हैंडपंप सूख चुके हैं। गांव के करीब 200 परिवारों को 5 किलोमीटर दूर स्थित एक पुराने कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी साफ नहीं है, लेकिन मजबूरी में उसी का उपयोग करना पड़ रहा है।
मंदसौर में नलों से आ रहा बदबूदार पानी
मंदसौर के खानपुरा इलाके में लोगों को दूषित पानी मिल रहा है। रहवासियों के मुताबिक नलों से बदबूदार पानी के साथ कीड़े और गंदगी निकल रही है। पुरानी पाइपलाइन और गड्ढों के कारण पानी दूषित होने की बात सामने आ रही है।
खरगोन में जल संकट पर चक्काजाम
खरगोन जिले के टेमला गांव में भी जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव में तीन दिन में सिर्फ एक घंटे पानी मिल रहा है। कई दिनों तक सप्लाई बंद रहने से नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया।
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लगातार बढ़ती गर्मी और जल संकट के बीच ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई जगह टैंकर सप्लाई और हैंडपंप मरम्मत के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।