Guest Teachers Protest : भोपाल | राजधानी भोपाल में बुधवार को प्रदेशभर से आए हजारों अतिथि शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ‘अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में शिक्षकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।
चुनावी वादों को लेकर नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इन पर अमल नहीं हुआ। इससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।
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बड़े नेताओं के आश्वासन भी अधूरे
शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी न्याय दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
30 अप्रैल के बाद रोजगार पर संकट
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वार्षिक अनुबंध लागू नहीं होने की स्थिति में 30 अप्रैल के बाद करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के बेरोजगार होने का खतरा है। उन्होंने मांग की कि भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता से समायोजित किया जाए।
ई-अटेंडेंस और भुगतान को लेकर भी नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं को लेकर भी मुद्दा उठाया गया। शिक्षकों का कहना है कि कई बार उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है और भुगतान भी लंबित रहता है।
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भर्ती प्रक्रिया और अनुभव अंक पर सवाल
शिक्षकों ने भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि वर्षों से काम कर रहे शिक्षकों को अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने स्कोर कार्ड में हर साल अधिक अंक जोड़ने और पात्रता परीक्षाओं के अंक शामिल करने की मांग की।
ये हैं प्रमुख मांगें
- नियमितीकरण के लिए विशेष परीक्षा और कम से कम 30% पद आरक्षित किए जाएं
- भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों और बोनस अंक दिए जाएं
- वार्षिक 12 माह का अनुबंध लागू किया जाए
- बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और अवकाश की व्यवस्था हो
- ई-अटेंडेंस में सुधार और लंबित भुगतान तुरंत किया जाए
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिक्षकों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। राजधानी में हुए इस प्रदर्शन को सरकार के लिए बड़ा दबाव माना जा रहा है।