MP News : नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में एक बार फिर विभागीय अनुशासन की पोल खुल गई है। देनवा बफर जोन में सुरक्षा कर्मी प्रकाश यादव से मारपीट करने के गंभीर आरोप में डिप्टी रेंजर विष्णुकांत त्रिपाठी और दो वनरक्षकों को पद से हटा दिया गया है।
एसटीआर की डिप्टी डायरेक्टर ऋषभा नेताम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर त्रिपाठी को चूरना रेंज के सुपलई सर्किल ट्रांसफर कर दिया। वनरक्षक अर्जुन सिंह को छातीआम बीट और बरवेन्द्र उईके को सांगई बीट (पिपरिया बफर) भेजा गया। यह कार्रवाई सहायक संचालक आशीष खोपरागढ़े की रिपोर्ट पर हुई, जिसमें अधिकारियों की गलती साबित हुई। विभाग ने इसे आंतरिक अनुशासनहीनता बताया और आगे की जांच जारी रखी है।
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घटना 31 अक्टूबर की रात की है। सीताडोंगरी बीट में डिप्टी रेंजर त्रिपाठी, वनरक्षक अर्जुन सिंह, बरवेन्द्र उईके और सुरक्षा श्रमिक प्रकाश यादव पार्टी कर रहे थे। अचानक विवाद हो गया जब अधिकारियों ने प्रकाश से गश्ती मोबाइल फोन वापस मांगा।
प्रकाश को लगा कि उसे नौकरी से निकाला जा रहा है। बात बढ़ी तो हाथापाई हो गई। प्रकाश ने चोटें आईं और उसने देलाखारी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन विभाग ने आंतरिक जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि अधिकारी शराब पीकर विवाद कर रहे थे, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए जिम्मेदार कर्मियों के लिए गंभीर उल्लंघन है।
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डिप्टी रेंजर विष्णुकांत त्रिपाठी का नाम पहले भी विवादों में रहा है। इसी साल जून में देनवा बफर रेंज में वनरक्षक प्रवीण रघुवंशी से मारपीट और अभद्रता के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था। तब एसटीआर के प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर मयंक गुर्जर ने सस्पेंशन ऑर्डर जारी किया और उन्हें बागड़ा बफर रेंज अटैच कर दिया। त्रिपाठी ने उल्टा वनरक्षक पर अवैध कटाई छिपाने का आरोप लगाया था।
जांच में सीताडोंगरी बीट में सागौन और सतकटा के दर्जनों पेड़ कटे मिले। एक कर्मचारी निलंबित हुआ, दूसरे को हटाया गया, लेकिन नुकसान की वसूली नहीं हुई। त्रिपाठी ने हाईकोर्ट से स्टे लेकर बहाली कराई और फिर सीताडोंगरी बीट पर लौट आए। अब फिर मारपीट का आरोप लगने से विभाग की किरकिरी हो रही है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व वन्यजीव प्रेमियों के लिए स्वर्ग है, लेकिन विभागीय कर्मियों के ऐसे कारनामे इसकी छवि खराब कर रहे हैं। देनवा बफर जोन में अवैध कटाई और अब मारपीट जैसे मामले सामने आने से स्थानीय लोग नाराज हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी जंगल की रक्षा के नाम पर मनमानी करते हैं। जून की घटना में अवैध कटाई का खुलासा हुआ था, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। अब पार्टी विवाद में श्रमिक की पिटाई से विभाग पर सवाल उठ रहे हैं। प्रकाश यादव ने पुलिस में शिकायत की है, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
वन विभाग के सूत्र बता रहे हैं कि डिप्टी डायरेक्टर ऋषभा नेताम ने सख्ती दिखाई है। ट्रांसफर को सजा का रूप दिया गया है। दूरदराज की बीट्स में भेजकर अधिकारियों को सबक सिखाया जा रहा है। लेकिन कर्मचारी संघ नाराज है और कह रहा है कि जांच एकतरफा हुई।
त्रिपाठी फिर कोर्ट जा सकते हैं। पुराने मामले में भी अवैध कटाई से लाखों का नुकसान हुआ, लेकिन वसूली नहीं हुई। विभाग अब पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करवा सकता है।