Latest

IT Raid Update : 250 करोड़ की टैक्स चोरी, भोपाल-इंदौर में इनकम टैक्स का बड़ा खुलासा

Tax evasion of Rs 250 crore

Bhopal Indore IT Raid Tax Evasion : मध्य प्रदेश। इनकम टैक्स विभाग ने भोपाल, इंदौर और मुंबई में 30 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर 250 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड (SHMPL) और डीसेंट मेडिकल्स के ठिकानों से 150 करोड़ रुपये की बोगस बिलिंग और मेडिकल डिवाइस सप्लायर राजेश गुप्ता के यहां से 100 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के दस्तावेज बरामद हुए हैं। 2 सितंबर से शुरू हुई यह जांच 4 सितंबर 2025 तक पूरी होने की संभावना है। छापेमारी में करोड़ों की नकदी, सीज किए गए लॉकर और विदेशी निवेश से जुड़े सबूत भी सामने आए हैं।

इनकम टैक्स विभाग ने 2 सितंबर 2025 को सुबह 5 बजे से भोपाल, इंदौर और मुंबई में 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड (SHMPL), डीसेंट मेडिकल्स, और राजेश गुप्ता से जुड़े परिसरों पर केंद्रित थी। जितेंद्र तिवारी (साइंस हाउस के निदेशक) और राजेश गुप्ता इस जांच के मुख्य लक्ष्य हैं। छापों में CRPF की सुरक्षा के साथ 50 से अधिक आयकर अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।

राजेश गुप्ता: 100 करोड़ की टैक्स चोरी

  • राजेश गुप्ता, एक प्रमुख मेडिकल डिवाइस सप्लायर, के ठिकानों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की बोगस बिलिंग के दस्तावेज बरामद हुए। ये बिलिंग मुख्य रूप से मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति और बिक्री से संबंधित हैं।
  •  12 लाख रुपये की नकदी और एक लॉकर सीज किया गया, जिसे 4 सितंबर 2025 को खोला जाएगा। लॉकर में और अधिक नकदी या कीमती सामान होने की संभावना है।
  • जांच में पता चला कि गुप्ता ने युगांडा में मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के कारखाने में निवेश किया है। इसके अलावा, रियल एस्टेट में अवैध निवेश के दस्तावेज भी जब्त किए गए।
  • छापेमारी भोपाल के रचना नगर, लालघाटी और पंचवटी पार्क में गुप्ता के घर और कार्यालयों पर की गई।

साइंस हाउस और डीसेंट मेडिकल्स: 150 करोड़ की चोरी

  • साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड (भोपाल) और डीसेंट मेडिकल्स (इंदौर) में 150 करोड़ रुपये की बोगस बिलिंग का खुलासा हुआ। ये बिलिंग मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति और डायग्नोस्टिक सेवाओं से संबंधित हैं।
  • 2 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई, जिसमें से ज्यादातर डीसेंट मेडिकल्स के MR-5 कॉलोनी, इंदौर स्थित परिसर से मिली।
    एक लॉकर सीज किया गया, जिसे 4 सितंबर 2025 को खोला जाएगा।
  • जांच में पता चला कि दोनों कंपनियां शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए आय को छिपा रही थीं।

जितेंद्र तिवारी और अन्य

जितेंद्र तिवारी, साइंस हाउस के निदेशक, और उनके सहयोगी रोहित गुप्ता (सॉफ्टवेयर इंजीनियर), दिनेश बारोलिया, और शिखा राजोरिया से पूछताछ की जा रही है।
अन्य सप्लायर्स जैसे शैलेंद्र तिवारी और मोहन शर्मा के ठिकानों पर भी छापे मारे गए, लेकिन इनके बारे में अभी तक विस्तृत जानकारी नहीं मिली।

बोगस बिलिंग और रूट सिस्टम का रैकेट

आयकर विभाग की जांच बोगस बिलिंग रैकेट को उजागर करने पर केंद्रित है।

कंपनियां रूट सिस्टम के जरिए दूसरे राज्यों और देशों से कम कीमत पर मेडिकल डिवाइस मंगवाती थीं। फिर इन्हें उच्च कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था।
बिक्री का हिस्सा शेल कंपनियों के जरिए छिपाया जाता था, और बोगस बिलिंग के माध्यम से टैक्स चोरी की जाती थी।
राजेश गुप्ता के युगांडा में कारखाने और रियल एस्टेट में निवेश की जांच चल रही है, जो संभावित हवाला लेनदेन से जुड़ा हो सकता है।

जांच की स्थिति

छापेमारी 4 सितंबर 2025 तक पूरी होने की उम्मीद है। आयकर अधिकारी बरामद दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, और आयकर रिटर्न की जांच कर रहे हैं।
सीज किए गए लॉकरों को आज खोला जाएगा, जिससे और अधिक नकदी या संपत्ति की जानकारी मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इन व्यापारियों का एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से कथित संबंध है, जिसकी पहचान अभी उजागर नहीं की गई है।

साइंस हाउस और डीसेंट मेडिकल्स का बैकग्राउंड

साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड: भोपाल में 1994 से मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति और डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी। जितेंद्र तिवारी इसके निदेशक हैं। यह कंपनी सरकारी टेंडरों में सक्रिय है, लेकिन उपकरणों की खराब गुणवत्ता और टेस्ट रिपोर्ट में गड़बड़ी के लिए अक्सर जुर्माना झेलती रही है।
डीसेंट मेडिकल्स: इंदौर में मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति करने वाली कंपनी, जिसके ठिकानों पर MR-5 कॉलोनी में छापे मारे गए।
राजेश गुप्ता: भोपाल का एक प्रमुख व्यापारी, जो युगांडा में मेडिकल उपकरणों का कारखाना चलाता है और पूरे भारत में उपकरण सप्लाई करता है।

बरामद दस्तावेजों और नकदी के आधार पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 के तहत कार्रवाई होगी। इसमें जब्ती, जुर्माना, और संभावित जेल शामिल हो सकती है। इस रैकेट के खुलासे से मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला और सरकारी टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। यह जांच मेडिकल सेक्टर में पारदर्शिता लाने में मदद कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *