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Wildlife Water Crisis MP : बैतूल में गर्मी से वन्यजीवों पर संकट, पानी के लिए भटक रहे जानवर; सामाजिक संगठन ने शुरू की पहल

Wildlife Water Crisis MP

Wildlife Water Crisis MP : बैतूल। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब जंगलों तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण जंगलों के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे वन्यजीवों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सारणी स्टेट हाईवे से लगे आमडोल और बरेठा घाट जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बंदर, पक्षी और अन्य वन्यजीव पानी की तलाश में भटकते नजर आ रहे हैं।

वन्यजीवों के लिए शुरू हुई पहल

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था शुरू की है। संगठन के सदस्य जंगल और सड़क किनारे विभिन्न स्थानों पर पानी से भरे मटके रख रहे हैं, ताकि जानवरों को राहत मिल सके।

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टांकों का निर्माण और पानी की व्यवस्था

आमडोल और बरेठा घाट क्षेत्र में लगभग पांच स्थानों पर टांकों का निर्माण किया जा रहा है। इन टांकों में नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है, जिससे वन्यजीवों को लगातार जल उपलब्ध हो सके। कार्यकर्ता राहगीरों से भी अपील कर रहे हैं कि वे इन मटकों में पानी भरकर सहयोग करें।

चुनौतियां भी बनीं समस्या

हालांकि इस पहल के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर पानी के मटके चोरी होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहा है।

वन विभाग भी कर रहा प्रयास

वन विभाग भी अपने स्तर पर वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहा है। चिचोली रेंजर शैलेंद्र चौरसिया के अनुसार, क्षेत्र में 10 से 12 सीमेंट के टैंक (सासर) बनाए गए हैं, जबकि पश्चिम वन मंडल में 25 से 30 टैंक मौजूद हैं, जिन्हें टैंकरों के माध्यम से भरा जा रहा है।

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संकट की गंभीर स्थिति

पानी की कमी के चलते वन्यजीव अब जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। हाल ही में सोना घाटी क्षेत्र में कुत्तों के हमले में एक हिरण शावक की मौत भी हो चुकी है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

सामाजिक संगठनों की भूमिका अहम

ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की यह पहल वन्यजीवों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन रही है। स्थानीय लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे इस कार्य में सहयोग करें, ताकि जंगलों में जीवन सुरक्षित रह सके।

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