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Fake Birth Certificate: नर्मदापुरम जिला अस्पताल में जन्म प्रमाण-पत्र घोटाले का खुलासा, सरकारी पोर्टल से जारी हुए फर्जी सर्टिफिकेट

Fake Birth Certificate

Fake Birth Certificate: नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला अस्पताल से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े जन्म प्रमाण-पत्रों में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरोप है कि सरकारी CRS (Civil Registration System) पोर्टल का गलत इस्तेमाल कर फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र जारी किए गए। इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों पर फर्जी सील और नकली हस्ताक्षरों का भी इस्तेमाल किया गया। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस से जांच कराने की मांग की है।

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रजिस्ट्रार की आईडी से बदले गए रिकॉर्ड

अस्पताल के चिकित्सक और जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश सिंघल ने जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जानकारी दी है।शिकायत के मुताबिक, एक मामले में अस्पताल के रजिस्ट्रार की CRS पोर्टल आईडी का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए एक बच्चे के जन्म प्रमाण-पत्र में माता-पिता का नाम और पता बदल दिया गया। जबकि अस्पताल के मूल जन्म रजिस्टर और डिलीवरी रिकॉर्ड में ऐसा कोई बदलाव दर्ज नहीं है। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी आवेदन के संशोधित प्रमाण-पत्र भी जारी हो गया।

जुड़वा बच्चों के प्रमाण-पत्रों में भी मिली गड़बड़ी

जांच के दौरान एक और मामला सामने आया, जिसमें जुड़वा बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्रों में भी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और गंभीर अनियमितताएं मिलीं। इससे आशंका और गहरा गई कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया जा रहा फर्जीवाड़ा हो सकता है।

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फर्जी सील और नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल

लिखित शिकायत में यह भी बताया गया है कि जिन प्रमाण-पत्रों पर सवाल उठे हैं, उन पर लगी डिस्पैच सील अस्पताल की असली सील से अलग है। इतना ही नहीं, कार्यालय प्रभारी के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए हैं। इन तथ्यों के सामने आने के बाद आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल के बाहर कोई संगठित गिरोह फर्जी सील और जाली हस्ताक्षरों के जरिए सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहा है।

सिविल सर्जन ने पुलिस से मांगी जांच

जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले ने बताया कि मामला सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को लिखित शिकायत भेज दी है और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने का अनुरोध किया है। साथ ही जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि सरकारी पोर्टल का दुरुपयोग कैसे हुआ और इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

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