SDM Court Indore : इंदौर। जिस घर को बनाने में अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगा दी… बुढ़ापे में उसी घर से बेदखल होने की नौबत आ गई! इंदौर की ये कहानी हर उस मां-बाप की आंखें खोल देगी, जो अपने बच्चों पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं।”
क्या है पूरा मामला
मामला शिवाजी नगर निवासी हीरालाल कश्यप और धर्मा देवी कश्यप से जुड़ा है, जहां कलेक्टोरेट में आयोजित वृद्धजन विशेष जनसुनवाई के दौरान एसडीएम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने छोटे बेटे के परिवार को मकान का हिस्सा खाली करने के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर बुजुर्ग दंपती को मकान का कब्जा सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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एक ही घर में बढ़ता गया तनाव
बताया गया कि तीन मंजिला मकान के ग्राउंड फ्लोर पर बुजुर्ग दंपती रहते हैं, जबकि ऊपर की मंजिलों पर उनके दोनों बेटों का परिवार रहता है। दंपती का आरोप है कि बेटे और बहुएं उनका ध्यान नहीं रखते थे। खासकर छोटी बहू के व्यवहार से वे काफी परेशान थे।
परिवार का कहना है कि रिश्तेदारों और बेटियों के घर आने पर भी विवाद की स्थिति बन जाती थी। लगातार तनाव के कारण बुजुर्ग दंपती मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे।
तीन महीने पहले लगाई थी गुहार
करीब तीन महीने पहले कश्यप दंपती ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत आवेदन देकर प्रशासन से मदद मांगी थी। मामले की सुनवाई के बाद एसडीएम घनश्याम धनगर ने दंपती के पक्ष में आदेश जारी किया।
पुलिस की मौजूदगी में खाली कराया मकान
आदेश में साफ कहा गया है कि तय समय में अगर बेटा-बहू मकान खाली नहीं करते हैं, तो तहसीलदार पुलिस बल की मदद से मकान खाली कराकर बुजुर्ग दंपती को कब्जा दिलाएंगे।
“बुजुर्गों को सम्मान दिलाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी”
दंपती के वकील अमित मंडलोई ने कहा कि अक्सर इस उम्र में बुजुर्ग कानूनी प्रक्रिया समझ नहीं पाते और न्याय के लिए भटकते रहते हैं। ऐसे में उन्हें उनका हक और सम्मान दिलाना समाज की बड़ी जिम्मेदारी है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों की कहानी भी है जो अपने ही घर में उपेक्षा और अकेलेपन का सामना कर रहे हैं।