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Bhopal Suicide Case : पूर्व जज गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत, पति समर्थ सिंह की याचिका पर 18 मई को सुनवाई

Twisha Sharma Case

Bhopal Suicide Case : भोपाल।  भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में हुए चर्चित ट्विशा शर्मा सुसाइड मामले में अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोपों में दर्ज एफआईआर के बाद मृतका की सास और रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह को अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई है। वहीं पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर 18 मई को सुनवाई तय की गई है।

यह मामला 12 मई 2026 की रात सामने आया था, जब 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव कटारा हिल्स स्थित घर में फंदे से लटका मिला था। ट्विशा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी 12 दिसंबर 2025 को भोपाल निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी।

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एफआईआर के बाद पुलिस की कार्रवाई

मामले में भोपाल पुलिस ने मृतका की सास गिरीबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ हत्या, दहेज प्रताड़ना और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने बताया कि परिजनों के बयान, शुरुआती जांच और परिस्थितियों के आधार पर मामला दर्ज किया गया।

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की दो टीमों को आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश देने के लिए लगाया गया था। हालांकि इसी बीच गिरीबाला सिंह ने अदालत से अग्रिम जमानत की मांग की।

18 घंटे में मिली अग्रिम जमानत

जानकारी के अनुसार, केस दर्ज होने के करीब 18 घंटे के भीतर पूर्व जज गिरीबाला सिंह को अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई। अदालत में उनकी उम्र, स्वास्थ्य और उच्च न्यायिक सेवा में लंबे अनुभव का हवाला दिया गया।

इस फैसले के बाद मामले को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आम मामलों की तुलना में इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई।

पति समर्थ सिंह पर गंभीर आरोप

मृतका के भाई हर्षित शर्मा, जो भारतीय सेना में मेजर हैं, ने समर्थ सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्विशा को शादी के बाद लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार का दावा है कि दहेज को लेकर दबाव बनाया जाता था।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ट्विशा के शव के हाथ और कान पर चोट के नीले निशान मिले थे, जिससे उन्हें हत्या की आशंका है। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ आत्महत्या का मामला नहीं बल्कि योजनाबद्ध प्रताड़ना का परिणाम है।

हर्षित शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि समर्थ सिंह ने घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि समर्थ पेशे से वकील हैं और उनकी मां रिटायर्ड जिला जज होने के कारण शुरुआती स्तर पर पुलिस कार्रवाई में देरी हुई।

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थाने के बाहर रातभर प्रदर्शन

ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कटारा हिल्स थाने पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में उनकी बात नहीं सुनी और थाने का मुख्य गेट बंद कर दिया गया।

हालांकि पुलिस का कहना था कि उस समय बयान दर्ज करने और पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। आवश्यक जांच के बाद ही कानूनी कार्रवाई संभव थी।

अगले दिन भी परिजन महिला थाने पहुंचे और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

अंतिम संस्कार रोककर बैठे थे परिजन

परिवार ने एफआईआर दर्ज होने तक ट्विशा का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। परिजनों का कहना था कि जब तक आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बेटी को अंतिम विदाई नहीं देंगे। एफआईआर दर्ज होने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

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