Betul Dumping Protest : बैतूल। बैतूल के पास कड़ाई ग्राम पंचायत में प्रस्तावित कचरा डंपिंग साइट का स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर डंपिंग साइट को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
ग्रामीणों का कहना है कि शहर का कचरा खुले में डंप किए जाने से पर्यावरण, भूजल और गौवंश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
गौवंश के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने आवेदन में बताया कि डंपिंग साइट पर फेंके जाने वाले प्लास्टिक और जहरीले कचरे को आवारा और पालतू गौवंश खाने को मजबूर होंगे। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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उन्होंने गोठाना क्षेत्र की पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी इस तरह के कचरे के कारण कई गायों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उचित व्यवस्था नहीं की गई तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
भूजल और जलस्रोत प्रदूषित होने का डर
स्थानीय लोगों ने पर्यावरण प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी आसपास के जलस्रोतों और भूजल को प्रदूषित कर सकता है।
ग्रामीणों के मुताबिक इससे गांवों में बीमारियां और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। खासकर गर्मियों में जलस्रोतों के दूषित होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पुरानी घटनाओं का दिया हवाला
ग्रामीणों ने शाहपुर क्षेत्र के कोयलारी में हुई घटनाओं का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि पहले कचरे में छिपे विस्फोटकों के कारण गौवंश घायल हुए थे और कुछ की मौत भी हो गई थी। इसी वजह से ग्रामीण डंपिंग साइट को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हैं और किसी भी तरह का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं।
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ग्रामीणों की ये हैं मुख्य मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
- डंपिंग साइट को आबादी और गौचर भूमि से दूर बनाया जाए
- पूरे क्षेत्र की बाड़ेबंदी की जाए
- गौवंश के प्रवेश पर रोक लगाई जाए
- कचरे का वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग प्रबंधन किया जाए
- बायो-ट्रीटमेंट और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था हो
ग्रामीणों का कहना है कि बिना सुरक्षा व्यवस्था के खुले में कचरा डंप करना क्षेत्र के लिए खतरा बन सकता है। यह मामला पहले भी विवादों में रह चुका है। कड़ाई ग्राम पंचायत में कचरा डंपिंग को लेकर पहले जारी आदेश के खिलाफ ग्रामीण हाईकोर्ट तक पहुंच चुके हैं। अब नए प्रस्ताव के बाद एक बार फिर क्षेत्र में विरोध बढ़ गया है और ग्रामीणों में असंतोष का माहौल देखा जा रहा है।