Raisen News : रायसेन | रायसेन जिले में नरवाई (पराली) जलाने की एक और घटना ने बड़ा नुकसान कर दिया। जिला मुख्यालय से करीब 4 किलोमीटर दूर ग्राम मनियाखेड़ी में सोमवार देर रात आग खेत में बने टीनशेड तक पहुंच गई, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
गेहूं, भूसा और पाइपलाइन जलकर राख
इस आगजनी में किसान दौलतराम पाराशर की कटी हुई गेहूं की फसल (करीब 20-25 क्विंटल), लगभग 20 टन भूसा और सिंचाई पाइपलाइन जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक किसान को करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है।
दोपहर में लगी आग रात तक फैल गई
जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत सोमवार दोपहर नरवाई जलाने से हुई थी। धीरे-धीरे आग ने विकराल रूप ले लिया और देर रात खेत में बने टीनशेड तक पहुंच गई। आग इतनी तेज थी कि वहां रखा पूरा कृषि सामान इसकी चपेट में आ गया।
दमकल की टीम ने पाया काबू
घटना की सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, मंगलवार दोपहर तक कुछ स्थानों पर आग सुलगती रही, जिससे दोबारा भड़कने का खतरा बना रहा।
जिले में बढ़ रहे नरवाई जलाने के मामले
रायसेन जिले में नरवाई जलाने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब तक ऐसे मामलों की संख्या 2600 के पार पहुंच चुकी है। औसतन हर दिन 60 से अधिक स्थानों पर आग लगने की सूचनाएं मिल रही हैं।
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सैटेलाइट से भी दर्ज हो रहीं घटनाएं
प्रशासन के मुताबिक, केवल 22 अप्रैल को ही एक दिन में 195 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सैटेलाइट इमेज के जरिए दर्ज की गई थीं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
समझाइश के बावजूद जारी है पराली जलाना
शासन-प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता और कार्रवाई के बावजूद किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। यह न केवल आगजनी की घटनाओं को बढ़ा रहा है, बल्कि पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। इसके बावजूद इस प्रथा का जारी रहना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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