Congress IT cell : भोपाल। राजधानी भोपाल में राजस्थान साइबर पुलिस की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल एक कथित पत्र मामले में कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिजनों ने इस कार्रवाई को ‘अपहरण’ करार देते हुए थाना कोहेफिजा में शिकायत दर्ज कराई है और तीनों युवकों की तत्काल जानकारी व सुरक्षित वापसी की मांग की है।
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“कोर्ट ले जाने की बात कहकर ले गए”
शिकायतकर्ता मोहम्मद आमिर ने आरोप लगाया है कि उनके भांजे बिलाल खान, निखिल और इनाम को राजस्थान पुलिस के अधिकारी बताकर कुछ लोग अपने साथ ले गए। परिजनों के अनुसार उन्हें यह कहा गया था कि तीनों को कोर्ट ले जाया जा रहा है और जमानत की प्रक्रिया होगी।
लेकिन परिजनों का कहना है कि न तो किसी कोर्ट में पेशी हुई और न ही मेडिकल कराया गया। इसके बाद से तीनों का कोई स्पष्ट पता नहीं है।
वायरल पत्र मामला बना कार्रवाई की वजह
पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल हुए एक कथित पत्र से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस पत्र को सोशल मीडिया पर फैलाने में भोपाल स्थित कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े इन तीनों कार्यकर्ताओं की भूमिका की जांच की जा रही है।
इसी सिलसिले में राजस्थान साइबर पुलिस की टीम भोपाल पहुंची थी और साक्ष्य जुटाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

‘गुपचुप गिरफ्तारी’ पर उठे सवाल
परिजनों और कांग्रेस समर्थकों का आरोप है कि तीनों को बिना किसी आधिकारिक सूचना, बिना मेडिकल और बिना कोर्ट पेशी के ले जाया गया, जो कानून प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
परिजनों का कहना है कि उन्हें जमानत की तैयारी करने के लिए भी कहा गया, जिससे उन्हें भ्रमित किया गया।
पीसी शर्मा ने उठाए सवाल
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने तीनों की सुरक्षित वापसी की मांग की है और मामले में स्पष्टता की आवश्यकता बताई है।
27 अप्रैल की पेशी का आदेश
तीनों कार्यकर्ताओं की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को 27 अप्रैल को तीनों को पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस से इस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण भी मांगा है, साथ ही 20 और 21 अप्रैल के सीसीटीवी फुटेज पेश करने के आदेश दिए हैं।
कैसे बढ़ा मामला
- 19 अप्रैल 2026: तीनों कार्यकर्ताओं को भोपाल में रोका गया
- 21 अप्रैल (दोपहर): कलेक्टर कार्यालय के पास रखने की जानकारी परिजन को मिली
- 21 अप्रैल (3 बजे): सिल्वर ब्रेजा कार से तीनों को ले जाया गया
- 21 अप्रैल (3:45 बजे): कोर्ट में पेश न किए जाने पर परिजनों ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई