Sehore News : सीहोर। मध्यप्रदेश में नई तकनीक से बनी सड़कों की पोल एक बार फिर खुल गई है। सीहोर जिले में प्रदेश की पहली फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से निर्मित सीहोर-श्यामपुर सड़क अपनी 10 साल की गारंटी के बावजूद पहले ही साल में जगह-जगह उखड़ गई। करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह 24.30 किलोमीटर लंबी सड़क 2023 में पूरी हुई थी।
निर्माण के समय दावा किया गया था कि यह सड़क सामान्य सड़कों से दोगुनी मजबूत होगी और लागत भी आधी आएगी। लेकिन पहली ही बारिश में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए, दरारें पड़ गईं और पुलिया तक धंस गई।
अब इस बदहाली पर भोपाल-सीहोर लोकसभा सांसद आलोक शर्मा ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता करार देते हुए ठेकेदार कंपनी को दोबारा सड़क बनाने के सख्त निर्देश दिए हैं। सांसद ने कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह सड़क सीहोर को श्यामपुर से जोड़ती है और जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे कुरावर, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, गुना, ग्वालियर और राजस्थान जाने वाले हजारों यात्री रोज गुजरते हैं। सड़क खराब होने से सैकड़ों गांवों के किसान, मजदूर, छात्र और आम लोग भारी मुसीबत झेल रहे हैं।
वाहन चालकों को गड्ढों से बचाने में पसीना छूट जाता है। रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं और एम्बुलेंस तक फंस जा रही हैं। किसानों की फसलें बाजार तक पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे नुकसान हो रहा है।
स्थानीय लोग बता रहे हैं कि बारिश के बाद सड़क पर पानी भर जाता है और कीचड़ हो जाता है। बच्चे स्कूल जाने में डरते हैं क्योंकि बसें देर से आती हैं या रास्ते में फंस जाती हैं।
सांसद आलोक शर्मा ने लोगों की शिकायतों पर तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने एमपीआरडीसी (मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि कंपनी ने घटिया सामग्री इस्तेमाल की है। सांसद ने स्पष्ट किया, “10 साल की गारंटी थी, लेकिन एक साल में ही सड़क बर्बाद हो गई। यह सरासर धांधली है।
ठेकेदार को अपनी जेब से दोबारा सड़क बनानी पड़ेगी। कोई समझौता नहीं होगा।” उन्होंने जांच के आदेश दिए और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
एमपीआरडीसी की जीएम सोनल सिन्हा ने पहले आश्वासन दिया था कि बारिश के बाद डामरीकरण कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक सिर्फ पैचवर्क हुआ है, जो कुछ दिनों में फिर उखड़ जाता है।
एफडीआर तकनीक क्या है? यह एक रिसाइक्लिंग तरीका है जिसमें पुरानी सड़क को उखाड़कर केमिकल मिलाया जाता है और नया मटेरियल बनाकर बिछाया जाता है। दावा था कि इससे पर्यावरण बचता है, लागत कम होती है और सड़क मजबूत बनती है।
चंडीगढ़ की कंपनी गर्ग संस ई-स्टेट प्रोमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने यह काम किया था। उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में सफल बताई गई यह तकनीक एमपी में फेल साबित हुई। 2023 में निर्माण पूरा होने के ठीक बाद पहली बारिश में सड़क टूट गई।
पुलिया धंसने से कई गांवों का संपर्क कट गया। अब दो साल बाद भी हालात जस के तस हैं। कांग्रेस ने इसे सरकार की नाकामी बताया और गड्ढों में उतरकर प्रदर्शन किया।