Simhastha 2028: उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए नवलखी के आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू बनाया जाएगा। इस परियोजना से उज्जैन में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को एक ही जगह कई तरह के वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखने का मौका मिलेगा। साथ ही वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
पहले चरण में तैयार होगा इंडिया ज़ोन
वन विभाग के मुताबिक इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘इंडिया ज़ोन’ बनाया जाएगा। यहां सिर्फ भारत में ही पाए जाने वाले वन्यजीव ही रखे जाएंगे। उन्हें पिंजरों में नहीं, बल्कि प्राकृतिक माहौल जैसा वातावरण देकर रखा जाएगा, ताकि पर्यटकों को जंगल जैसा अनुभव मिल सके। यहां ड्राइव-थ्रू सफारी, खुले बाड़े और घूमने आने वाले लोगों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
300 से ज्यादा वन्यजीवों को मिलेगा नया घर
इस फॉरेस्ट जू में 300 से ज्यादा वन्यजीव प्रजातियों को रखने की योजना बनाई गई है। वन विभाग का कहना है कि इस परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
दूसरे चरण में दुनिया के कई देशों के वन्यजीव भी होंगे
परियोजना के दूसरे चरण में ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ थीम पर काम होगा। इसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाने वाले कई वन्यजीव भी शामिल किए जाएंगे। इससे उज्जैन आने वाले पर्यटकों को एक ही जगह भारत के साथ-साथ दूसरे देशों के वन्यजीवों को देखने का मौका मिलेगा। इससे शहर की पहचान धार्मिक नगरी के साथ-साथ वन्यजीव पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में भी बनेगी।
ग्रीन ओवरब्रिज होगा सबसे खास
इस फॉरेस्ट जू का सबसे खास हिस्सा 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज होगा। क्योंकि जू का क्षेत्र दो हिस्सों में बंटा हुआ है, इसलिए इन्हें जोड़ने के लिए यह ओवरब्रिज और अंडरपास बनाया जाएगा। यहां बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक सफारी और पैदल चलने वालों के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे। ओवरब्रिज पर बड़ी संख्या में पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, ताकि वन्यजीव बिना किसी परेशानी के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जा सकें और पर्यटकों को भी जंगल जैसा प्राकृतिक माहौल महसूस हो।