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Petrol Price Hike: “देशभर में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम, 9 दिनों में तीसरी बार इजाफा”, भोपाल में पेट्रोल ₹111 के पार”

Petrol Price Hike

 

मुख्य बिंदु

  • देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं
  • 9 दिनों में लगातार 3 बार दाम बढ़े
  • देश और राज्य में अब तक करीब ₹5 की बढ़ोतरी
  • अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी

 

Petrol Price Hike : भोपाल।  “देशभर में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की जेब पर असर डाला है। सिर्फ दो हफ्तों में तीसरी बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम जनता पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी ईंधन के दाम बढ़ गए हैं।”

9 दिनों के अंदर ही पेट्रोलियम कंपनियों ने तीसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद भोपाल में पेट्रोल की कीमत ₹111.71 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

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इस महीने मध्य प्रदेश समेत देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार तीन बार बढ़ चुकी हैं। जहां 15 मई को पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद 19 मई को दूसरी बार करीब 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़े थे। अब तीसरी बढ़ोतरी के बाद मई में कुल मिलाकर पेट्रोल-डीजल करीब ₹5 प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं।

9 दिन में तीसरी बढ़ोतरी से बढ़ा बोझ

लगातार बढ़ती कीमतों से आम उपभोक्ताओं पर असर बढ़ता जा रहा है। 9 दिनों में तीन बार हुई बढ़ोतरी ने पेट्रोल-डीजल को और महंगा कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जिम्मेदार

कीमतों में बढ़ोतरी की अहम वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जबकि पहले यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थीं।

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कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

भारत में ईंधन की कीमतें कई घटकों पर निर्भर करती हैं। इसमें कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग लागत, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट शामिल होता है। इन्हीं कारणों से अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग होते हैं।

कंपनियों को नुकसान और बाजार का दबाव

सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का घाटा हो रहा है।

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