Shani Jayanti 2026 : नर्मदापुरम। नर्मदापुरम में शनिवार को शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनने पर हजारों श्रद्धालु नर्मदा घाटों पर पहुंचे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह संयोग करीब 13 साल बाद बना है, जिसके चलते सुबह से ही सेठानी घाट समेत जिले के प्रमुख घाटों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
इस बार वट सावित्री अमावस्या भी इसी दिन पड़ने से महिलाओं ने पीपल और वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना की।
सुबह 5 बजे से शुरू हुआ स्नान
पुण्य स्नान के लिए श्रद्धालु सुबह 5 बजे से ही घाटों पर पहुंचने लगे थे। सेठानी घाट, कोरी घाट, गोंदरी घाट और विवेकानंद घाट पर सबसे ज्यादा भीड़ रही। नर्मदापुरम के अलावा भोपाल, इटारसी, बैतूल, छिंदवाड़ा और विदिशा समेत कई जिलों से लोग यहां पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन कर दान-पुण्य किया। कई लोगों ने शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति की कामना के साथ विशेष पूजा-अर्चना की।
सुरक्षा के लिए प्रशासन अलर्ट
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। घाटों पर पुलिस, राजस्व विभाग, होमगार्ड और SDRF की टीमें तैनात रहीं। जवान लगातार अनाउंसमेंट कर श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकते रहे।
प्रशासन की ओर से घाटों पर बैरिकेडिंग, मेडिकल सहायता और निगरानी की विशेष व्यवस्था भी की गई।
शनि मंदिरों में विशेष पूजा
सेठानी घाट स्थित शनि मंदिर में शनि जयंती के अवसर पर विशेष सजावट की गई। मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। यहां श्रद्धालुओं ने तेल, काले तिल, नारियल और काला वस्त्र अर्पित कर पूजा की।
मंदिर में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें अभिषेक, हवन, महाआरती और विशाल भंडारा शामिल रहा।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां
- सुबह 8 बजे : अभिषेक और पूजन
- सुबह 10 बजे : श्रृंगार और हवन
- दोपहर 12 बजे : महाआरती
- दोपहर 1 बजे : विशाल भंडारा
- रात 8 बजे : सांध्यकालीन महाआरती
श्रद्धालुओं का मानना है कि शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या के इस विशेष संयोग में स्नान और दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।