Digital Safety Training : मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग के खतरे और सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब प्रदेश के स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए विभाग ड्राफ्ट तैयार कर रहा है, जिसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत छात्रों को सिर्फ थ्योरी नहीं बल्कि प्रैक्टिकल तरीके से भी डिजिटल दुनिया के खतरों और उनसे बचाव के उपाय सिखाए जाएंगे। खास बात यह है कि इस विषय की परीक्षा भी आयोजित की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों की समझ और जागरूकता का मूल्यांकन हो सके।
शुरुआत में 500 स्कूलों में लागू होगी योजना
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार शुरुआती चरण में प्रदेश के करीब 500 स्कूलों में साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे इसे अन्य सरकारी और निजी स्कूलों तक विस्तारित किया जाएगा।
विभाग का मानना है कि आज के दौर में बच्चे कम उम्र में ही इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने लगते हैं। ऐसे में उन्हें डिजिटल सुरक्षा की सही जानकारी देना बेहद जरूरी हो गया है।
क्या-क्या सिखाया जाएगा?
साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम में छात्रों को कई अहम विषयों की जानकारी दी जाएगी। इनमें शामिल होंगे
- ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव
- फर्जी लिंक और फिशिंग अटैक की पहचान
- सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स
- साइबर बुलिंग और उससे बचाव
- सुरक्षित पासवर्ड बनाना
- ऑनलाइन गेमिंग के खतरे
- डिजिटल फुटप्रिंट और डेटा सुरक्षा
- AI और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के तरीके
छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि किसी साइबर अपराध का शिकार होने पर शिकायत कहां और कैसे करनी है।
बच्चों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने की तैयारी
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। कई बार बच्चे अनजाने में फर्जी ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, निजी जानकारी साझा कर देते हैं या ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के जरिए ठगी का शिकार हो जाते हैं।
ऐसे में स्कूल स्तर पर साइबर सुरक्षा की शिक्षा बच्चों को जागरूक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने में मदद करेगी। इससे छात्रों में इंटरनेट के सुरक्षित और संतुलित उपयोग की समझ विकसित होगी।
परीक्षा के जरिए होगी समझ की जांच
स्कूल शिक्षा विभाग इस विषय को केवल जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहता। इसलिए साइबर सिक्योरिटी से जुड़े पाठ की परीक्षा भी ली जाएगी। परीक्षा के जरिए यह जांचा जाएगा कि छात्र डिजिटल सुरक्षा के नियमों और ऑनलाइन खतरों को कितनी अच्छी तरह समझ पाए हैं।
शिक्षकों को भी दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
जानकारी के मुताबिक इस विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग साइबर एक्सपर्ट्स और तकनीकी संस्थानों की मदद से ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कर रहा है, ताकि शिक्षक बच्चों को आसान भाषा में साइबर सुरक्षा की जानकारी दे सकें।
डिजिटल दौर की नई जरूरत
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में साइबर सिक्योरिटी केवल तकनीकी क्षेत्र का विषय नहीं रहेगा, बल्कि हर नागरिक के लिए जरूरी कौशल बन जाएगा। ऐसे में स्कूल स्तर पर इसकी शुरुआत बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के खतरों से बचाने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की सीख भी देगी।