MP Census 2026 : भोपाल | मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में आगामी जनगणना को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। जनगणना कार्य में लगाए गए सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, ताकि यह राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण कार्य तय समय सीमा में और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके।
1 मई से 30 मई तक अवकाश पर पूर्ण प्रतिबंध
जारी आदेश के अनुसार, 1 मई से 30 मई 2026 तक जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं दिया जाएगा। इस अवधि को जनगणना के पहले चरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें और कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा न आने दें।
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केवल विशेष परिस्थितियों में मिलेगी छुट्टी
हालांकि, सरकार ने कुछ राहत भी दी है। अगर किसी कर्मचारी के सामने अत्यंत जरूरी या आपात स्थिति आती है, तो उसे अवकाश दिया जा सकता है। लेकिन इसके लिए संबंधित विभाग के प्रमुख (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति अवकाश लेने पर प्रशासनिक कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।
1 मई से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण
मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना का पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इस चरण में “मकान सूचीकरण एवं गणना” का कार्य किया जाएगा। इसके तहत कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों की संख्या, उनकी स्थिति, परिवारों की जानकारी और अन्य बुनियादी आंकड़े एकत्र करेंगे। यह चरण आगे होने वाली जनसंख्या गणना की नींव तैयार करता है।
घर-घर जाकर जुटाए जाएंगे आंकड़े
पहले चरण में कर्मचारियों को निर्धारित क्षेत्रों में जाकर प्रत्येक घर का सर्वे करना होगा। इसमें आवासीय संरचना, परिवार के सदस्यों की संख्या, सुविधाओं की उपलब्धता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज की जाएगी। यह डेटा आगे की योजना निर्माण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश
राज्य सरकार और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कर्मचारियों को समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहने और पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
योजनाओं और नीतियों की नींव है जनगणना
जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार के लिए बेहद अहम होते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की विकास योजनाएं, संसाधनों का आवंटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियां बनाई जाती हैं। ऐसे में इस प्रक्रिया का सही और समयबद्ध तरीके से पूरा होना बेहद जरूरी है।
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