Raisen News : रायसेन। रायसेन जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। किसानों की जीवनरेखा माना जाने वाला बारना बांध अब खुद अपनी हालत पर सवालों के घेरे में है। यह बांध साल 1970 में बनाया गया था और 1975 से लगातार सिंचाई के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इसी बांध के पानी से भोजपुर, उदयपुरा और बुधनी विधानसभा क्षेत्रों की करीब 90 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। लेकिन आज इस ऐतिहासिक बांध की हालत देखकर स्थानीय लोग और किसान काफी परेशान हैं।
जगह-जगह दरारें, टूटी रेलिंग और लापरवाही के निशान
बांध के ऊपर से गुजरने पर इसकी बदहाल स्थिति साफ नजर आती है। कई जगहों पर रेलिंग का प्लास्टर उखड़ चुका है और दीवारों में गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति काफी समय से बनी हुई है, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिक काम किया गया है।
वहां रहने वाले लोगों के मुताबिक, जल संसाधन विभाग हर साल रखरखाव के लिए बजट जारी करने का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम दिखाई नहीं देता। हालत यह है कि बांध पर लगे स्ट्रीट लाइट के खंभे तो मौजूद हैं, लेकिन उनमें कई जगह बल्ब तक नहीं हैं। रात के समय यह इलाका और भी डरावना हो जाता है।
“बांध की सुरक्षा ही हमारी सुरक्षा है” — किसान
स्थानीय किसान प्रतिनिधि रामनारायण रघुवंशी ने कहा कि बारना बांध उनके लिए सिर्फ एक संरचना नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। उनके मुताबिक, “बांध की दीवारों में आई दरारें सीधे हमारी फसलों और हमारे भविष्य पर खतरा हैं। सरकार को तुरंत इसकी उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और यह देखना चाहिए कि मेंटेनेंस का पैसा आखिर जा कहां रहा है।”
भारी बारिश में खतरे की आशंका
ग्रामीणों की चिंता अब और बढ़ गई है क्योंकि मानसून के दौरान बांध पर पानी का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में अगर इन दरारों की समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। लोगों को डर है कि किसी बड़ी बारिश में यह लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है, जिससे आसपास के कई गांवों की फसलें और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।