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Drinking water crisis : गड्ढे का गंदा पानी पीने को मजबूर 200 आदिवासी, नर्मदापुरम में नल-जल योजना नहीं पहुंची

Drinking water crisis

Drinking water crisis : नर्मदापुरम।   नर्मदापुरम जिले के मढ़ई के पास जंगल में बसे पापड़पानी गांव में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। यहां रहने वाले करीब 40 आदिवासी परिवारों के लगभग 200 लोग आज भी मजबूरी में गड्ढे का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अफसरों की लापरवाही के कारण गांव तक नल-जल योजना नहीं पहुंच पाई है।

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हैंडपंप बंद, गंदा पानी ही सहारा

गांव में पानी का एकमात्र साधन हैंडपंप पिछले 8 दिनों से खराब पड़ा है। ऐसे में लोगों को करीब 200 मीटर दूर खुले गड्ढे (झिरिया) से पानी लाना पड़ रहा है। यह पानी पीने योग्य नहीं है, फिर भी मजबूरी में लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। पानी में काई और गंदगी साफ दिखाई देती है।

नल-जल योजना का लाभ नहीं मिला

ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के अन्य गांवों में नल-जल योजना से नियमित पानी सप्लाई हो रही है, लेकिन पापड़पानी गांव अब भी इस सुविधा से वंचित है। कई बार मांग करने के बावजूद यहां योजना लागू नहीं की गई है।

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खतरे में लोगों की जान

ग्रामीणों को 3 फीट नीचे उतरकर गड्ढे से पानी भरना पड़ता है, जिससे गिरने और चोट लगने का खतरा बना रहता है। सुबह-शाम महिलाएं और बच्चे भी इसी जोखिम के बीच पानी भरने जाते हैं।

ग्रामीणों की समस्या

लोगों का कहना है कि हैंडपंप कभी चलता है और कभी खराब हो जाता है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में गंदा पानी छानकर पीना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

ग्राम पंचायत सचिव के अनुसार गांव में एक हैंडपंप है, जिसे खराब होने पर पीएचई विभाग की मदद से ठीक कराया जाता है। फिलहाल पापड़पानी में नल-जल योजना लागू नहीं है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों के अनुसार गंदा या रुका हुआ पानी पीने से टाइफाइड और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पानी को उबालकर या छानकर पीना सुरक्षित माना जाता है।

पापड़पानी गांव में पेयजल संकट केवल सुविधा की कमी नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। ग्रामीण अब भी नल-जल योजना के जल्द विस्तार और स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

भीषण गर्मी में सिर पर प्लास्टिक का डब्बा रखकर पानी लेने जा रही महिला।

झिरिया में उतरकर पानी भर रहे ग्रामीण। जो काफी दूषित नजर आ रहा है। - Dainik Bhaskar

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