Supreme Court : मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर चल रहे विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। राज्य सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ दोपहर 2 बजे ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगी।
1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों का मामला
यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश से जुड़ा हुआ है। कोर्ट के निर्देश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने उन शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी थी, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1998 से 2009 के बीच बिना टीईटी के हुई थी।
राज्य सरकार की मेरिट प्रक्रिया के तहत हुई इन नियुक्तियों से जुड़े शिक्षकों की संख्या प्रदेश में करीब डेढ़ लाख बताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सेवा समाप्ति तक की कही थी बात
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि कोई शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल नहीं होता है तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। आदेश के बाद आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय द्वारा निर्देश जारी किए गए थे, जिसके बाद प्रदेशभर में शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था।
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन भी किया और मुख्यमंत्री व स्कूल शिक्षा मंत्री समेत कई जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से आदेश पर पुनर्विचार की मांग की।
सरकार और शिक्षक संगठनों ने दायर की रिव्यू पिटीशन
पिछले महीने शासकीय शिक्षक संगठन, राज्य कर्मचारी संघ सहित कई शिक्षा संगठनों और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी।
बताया जा रहा है कि सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी। खास बात यह है कि सुनवाई जजों के चेंबर में नहीं बल्कि ओपन कोर्ट में की जाएगी, जिससे शिक्षकों की ओर से पेश अधिवक्ताओं को सीधे बहस करने का मौका मिलेगा।
प्रदेशभर के लाखों शिक्षकों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई और फैसले पर टिकी हुई है।
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