Bhopal Metro News : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो परियोजना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन के शहर के पुराने कब्रिस्तानों के नीचे से गुजरने की योजना पर वक्फ बोर्ड की कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई है।
कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो पर विवाद
भोपाल टॉकीज क्षेत्र स्थित प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो लाइन निकालने की योजना को लेकर “कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा” ने मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में याचिका दायर की है।
कमेटी का कहना है कि इस रूट से हजारों कब्रों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का मुद्दा
याचिका में बताया गया है कि संबंधित कब्रिस्तान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर के सबसे पुराने और बड़े कब्रिस्तानों में शामिल है।
यहां हजारों कब्रें मौजूद हैं, जिनकी संरचना और अस्तित्व पर खतरा बताया जा रहा है।
तकनीकी जानकारी साझा न करने का आरोप
कमेटी ने आरोप लगाया है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट और सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। इससे लोगों में आशंकाएं और बढ़ गई हैं।
कोर्ट में रोक लगाने की मांग
कमेटी की ओर से अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान वक्फ अधिकरण में पैरवी कर रहे हैं।
याचिका में मांग की गई है कि:
- मेट्रो निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए
- वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति बनाए रखी जाए
- बिना अनुमति किए गए निर्माण को हटाया जाए
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नारियलखेड़ा में वक्फ जमीन पर निर्माण का आरोप
दूसरा विवाद नारियलखेड़ा क्षेत्र की वक्फ भूमि से जुड़ा है।
कमेटी का दावा है कि:
- करीब 11.93 हेक्टेयर जमीन वक्फ संपत्ति है
- लगभग 1.40 एकड़ भूमि पर बिना अनुमति निर्माण किया जा रहा है
- पिलर निर्माण के लिए खुदाई और भारी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है
कमेटी ने इसे वक्फ अधिनियम का उल्लंघन और अवैध अतिक्रमण बताया है।
विधायक आतिफ अकील का विरोध
भोपाल उत्तर से विधायक आतिफ अकील ने भी इस मामले में कड़ा विरोध जताया है।
उन्होंने कहा कि जब पहले से ही क्षेत्र में कब्रिस्तान मौजूद है, तो वहां मेट्रो की योजना बनाना ही गलत था।
उन्होंने कहा, “जिंदा लोगों को तो हम खुश नहीं रख पाए, कम से कम मृतकों को तो शांति से रहने दें।”
भोपाल मेट्रो परियोजना के तहत करीब 3.39 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग बनाई जा रही है, जिसमें दो स्टेशन भी प्रस्तावित हैं। इसके लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए लगभग 24 मीटर गहराई में खुदाई की जा रही है।
यह मामला धार्मिक भावनाओं, शहरी विकास और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। अब यह देखना अहम होगा कि वक्फ अधिकरण और प्रशासन इस विवाद का समाधान कैसे निकालते हैं।