Harda News : हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में चेक बाउंस के एक मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पिता और पुत्र दोनों को 6-6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रेमदीप शाह द्वारा सुनाया गया।
अदालत ने पाया कि दोनों अभियुक्तों ने बैंक से लिया गया ऋण समय पर नहीं चुकाया और भुगतान के लिए दिया गया चेक भी बाउंस हो गया। इसके बाद उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई।
SBI का लोन नहीं चुकाया
मामले के अनुसार, लक्ष्मीनारायण धनगर ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत 4,38,000 रुपये का ऋण लिया था, जबकि उनके पुत्र गौरव धनगर ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 5,38,000 रुपये का लोन लिया था। समय के साथ ब्याज बढ़ने पर पिता पर 5,33,801 रुपये और पुत्र पर 5,99,094 रुपये की बकाया राशि हो गई थी।
बैंक द्वारा बार-बार नोटिस और दबाव के बाद पिता-पुत्र ने भुगतान के लिए State Bank of India (SBI) की हंडिया शाखा को एक चेक दिया।
लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया।
चेक बाउंस होने के बाद बैंक ने परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत अदालत में शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी माना।
12.54 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
अदालत ने सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया है:
- लक्ष्मीनारायण धनगर को 5,90,902 रुपये
- गौरव धनगर को 6,63,622 रुपये
दोनों को मिलाकर 12.54 लाख रुपये से अधिक की राशि SBI को प्रतिकर के रूप में चुकानी होगी।
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कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि तय समय में मुआवजा नहीं दिया गया, तो दोनों को अतिरिक्त 6 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। यह फैसला उन लोगों के लिए एक सख्त संदेश है जो बैंक से लोन लेकर समय पर भुगतान नहीं करते या चेक बाउंस जैसे मामलों को हल्के में लेते हैं।