Betul Dirty Water : मध्य प्रदेश। बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी तहसील का दानवाखेड़ा गांव इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। गांव में झिरी का गंदा पानी पीने और नहाने से अज्ञात बीमारी फैल गई है। इस बीमारी की चपेट में आने से दो मासूम बच्चों की जान जा चुकी है और 50 से अधिक बच्चे-बूढ़े बीमार हो चुके हैं।
गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम गांव पहुंची और बीमार लोगों का मौके पर ही इलाज शुरू किया। टीम ने कुल 80 ग्रामीणों की जांच की। इनमें 55 लोगों को खुजली और त्वचा संबंधी गंभीर रोग मिले।
इसके अलावा 6 लोगों को मौसमी बुखार और 8 लोगों को सर्दी-खांसी की शिकायत पाई गई। सभी मरीजों को दवाइयां दी गईं और साफ-सफाई के लिए समझाइश दी गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) मनोज हुरमाड़े के निर्देश पर यह टीम गांव पहुंची थी। टीम में डॉ. पुरुषोत्तम सरियम, डॉ. आशीष और खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे।
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खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि दानवाखेड़ा बेहद दुर्गम और जंगल से घिरा गांव है। यहां न तो प्राथमिक स्कूल है, न आंगनवाड़ी और न ही कोई स्वास्थ्य केंद्र या उप-स्वास्थ्य केंद्र। पीने का एक भी हैंडपंप नहीं है।
ग्रामीण और उनके पशु दोनों झिरी के गंदे पानी पर निर्भर हैं। जांच में पाया गया कि झिरी का पानी पूरी तरह काई और कीचड़ से भरा हुआ है, जो पीने लायक बिल्कुल नहीं है। इसी दूषित पानी के कारण त्वचा रोग और अन्य बीमारियां फैल रही हैं।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि बारिश के दिनों में गांव पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है। जैसे ही बीमारी की सूचना मिली, तुरंत टीम भेजकर इलाज शुरू कराया गया। अब गांव में क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं और लोगों को उबालकर पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
गांव की एक और दर्दनाक सच्चाई यह है कि यहां सरकारी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। बच्चों के लिए कोई स्कूल नहीं है। ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर एक झोपड़ी में अस्थायी स्कूल शुरू किया है। बीए पास युवक बाबूलाल लविस्कर बच्चों को पढ़ाते हैं और गांव वाले हर महीने चंदे से उन्हें 3,000 रुपये मानदेय देते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके गांव में जल्द से जल्द हैंडपंप, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाए, ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों।