Campaign Against Child Marriage : मध्य प्रदेश। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर क्षेत्र में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का बड़ा अभियान चल रहा है। शुक्रवार को ग्राम नाटाराम और रनारा में “बाल विवाह मुक्त राजगढ़” अभियान के तहत दो अलग-अलग जागरूकता चौपालों का आयोजन किया गया। इन चौपालों में सैकड़ों ग्रामीण, खासकर महिलाएं और युवतियां बड़ी संख्या में शामिल हुईं। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि अब उनके गांव में एक भी बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा।
वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक एवं अभियान की नोडल अधिकारी रश्मि चौहान ने दोनों जगह ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “बाल विवाह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों का बचपन, उनकी पढ़ाई और उनके सपने छीन लेता है।
लड़कियों की सेहत बिगड़ती है, मां बनने की उम्र नहीं होने पर जान तक चली जाती है।” रश्मि चौहान ने सभी से अपील की कि गांव की हर महिला, हर मां, हर बहन मिलकर इस कुरीति को खत्म करे। चौपाल के अंत में उन्होंने सबको बाल विवाह मुक्त गांव बनाने की शपथ दिलाई।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी कैलाश सोनी ने भी महिलाओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा, “समाज में बदलाव की शुरुआत घर से होती है। अगर मां-बहन ठान लें कि बेटी की शादी 18 साल से पहले नहीं होगी, तो कोई पिता या भाई जबरदस्ती नहीं कर पाएगा।”
सोनी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की पूरी जानकारी दी – इसमें दो साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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साथ ही शादी कराने वाले पंडित, बैंडवाले, केटरर और बाराती भी सजा के दायरे में आते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या महिला हेल्पलाइन 181 पर सूचना दे सकता है।