सलकनपुर देवी लोक: 97 करोड़ की परियोजना पहली बारिश में सवालों के घेरे में, छतों से टपका पानी और कई जगह दिखीं खामियां
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध सलकनपुर देवी धाम में 97 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहे देवी लोक में पहली ही बारिश के बाद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। परिसर में पानी रिसने, जलभराव, सूखे पौधों, अधूरे कार्य और रखरखाव की कमियां सामने आई हैं।

सलकनपुर देवी लोक में पहली बारिश के बाद सामने आईं निर्माण संबंधी खामियां
सीहोर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शक्ति पीठ सलकनपुर देवी धाम में महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किए जा रहे करीब 97 करोड़ रुपये के देवी लोक प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। बारिश के बाद परिसर के कई हिस्सों में छतों और पिलरों से पानी रिसने, जलभराव, अधूरे निर्माण कार्य और खराब रखरखाव जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना में शुरुआती दौर में ही ऐसी खामियां चिंता का विषय हैं।
पिलरों और छतों से रिसा पानी
जानकारी के अनुसार, देवी लोक परियोजना के तहत करीब 90.35 करोड़ रुपये की लागत से सिविल निर्माण कार्य कराया गया है। परिसर में बनाए गए 64 योगिनी मंदिरों के पिलरों और छतों के किनारों से पहली ही बारिश में पानी रिसता दिखाई दिया। इससे निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मणिदीप क्षेत्र में जलभराव, श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर चिंता
बारिश के बाद मणिदीप क्षेत्र में लगाए गए बंसी पहाड़पुर पत्थरों पर पानी जमा हो गया। यदि जल निकासी की व्यवस्था समय रहते नहीं सुधारी गई तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं के फिसलने और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। परिसर के कई हिस्सों में भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली।
444 पौधों में से अधिकांश सूख गए
परिसर को हराभरा बनाने के उद्देश्य से ट्री-गार्ड सहित 444 पौधे लगाए गए थे। जानकारी के अनुसार प्रत्येक पौधे पर करीब 1,800 रुपये खर्च किए गए। हालांकि उचित देखरेख के अभाव में इनमें से लगभग 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण और सौंदर्यीकरण के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब तक नहीं लगी देवी प्रतिमा
परियोजना का प्रमुख आकर्षण आदिशक्ति पेडस्टल पर अब तक देवी प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकी है। निर्माण एजेंसी ने जुलाई के अंतिम सप्ताह तक प्रतिमा स्थापना का आश्वासन दिया था, लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
रखरखाव व्यवस्था पर भी उठे सवाल
परियोजना पूरी होने के बाद तीन वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी के पास है। इसके बावजूद धर्मशाला, मार्केट और मेला ग्राउंड क्षेत्र में कीचड़, कचरा और अव्यवस्था देखने को मिल रही है। परिसर की कई हाईमास्ट लाइटें बंद पड़ी हैं, जबकि कुछ लाइटें झूलती हुई नजर आ रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी
रायसेन जिले के उदयपुरा से आए श्रद्धालु रमेश कुमार धाकड़ ने बताया कि वे अक्सर यहां भंडारा कराने आते हैं, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परिसर में पर्याप्त रोशनी और बेहतर व्यवस्थाएं नहीं मिल रही हैं। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
पर्यटन निगम ने निरीक्षण का दिया आश्वासन
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यपालन यंत्री मनीषा भारती ने बताया कि उन्हें पानी टपकने और पौधों के सूखने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि जल्द ही स्थल का निरीक्षण किया जाएगा और जांच में सामने आने वाली कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा।
पहली ही बारिश में गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
पहली ही बारिश के बाद सामने आई इन खामियों ने करीब 97 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित एजेंसियां इन कमियों को कितनी जल्दी दूर करती हैं।

