620 करोड़ चंदा मिला, सिर्फ एक उम्मीदवार उतारा; देश की सबसे ज्यादा फंड पाने वाली पार्टियों ने किया हैरान!
जांच के दौरान एक और समानता सामने आई। छह सबसे ज्यादा चंदा हासिल करने वाली RUPP में से चार के रजिस्टर्ड कार्यालय गुजरात के एक ही इलाके में बताए गए।
भारत में राजनीतिक दलों की संख्या 2,800 से अधिक है, लेकिन चुनावी राजनीति में सक्रिय और मान्यता प्राप्त दल इनका छोटा हिस्सा ही हैं। चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में पार्टियां ऐसी हैं जिन्हें रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टी यानी RUPP का दर्जा प्राप्त है। इन दलों को चुनाव लड़ने और राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने का अधिकार है। इन पार्टियों को बेशुमार चंदा भी मिल रहा है। लेकिन राजनीतिक सक्रियता ना के बराबर है। देश की सबसे ज्यादा चंदा पाने वाली 6 पार्टियों के आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं।
620 करोड़ का चंदा मिला, उम्मीदवार सिर्फ एक उतारा
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 6 RUPP ऐसी हैं, जिन्हें साल 2023-24 में सबसे ज्यादा चंदा मिला। इनमें आम जनमत पार्टी (Aam Janmat Party), सत्यवादी रक्षक पार्टी (Satyavadi Rakshak Party), स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (Swatantrata Abhivyakti Party), न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी (New India United Party), भारतीय नेशनल जनता दल (Bharatiya National Janata Dal), और गरीब कल्याण पार्टी (Gareeb Kalyan Party) पार्टियों के नाम शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा चंदा आम जनमत पार्टी को लगभग 620 करोड़ रुपये मिला। लेकिन हैरानी तब हुई जब पार्टी ने चुनाव में केवल एक उम्मीदवार को चुनाव में उतारा।
पड़ताल के दौरान आम जनमत पार्टी के संगठन और उसके पदाधिकारियों को लेकर भी सवाल सामने आए। पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष अनामिका पासवान ने दावा किया कि वह 2022 में ही पार्टी से इस्तीफा दे चुकी थीं और बाद में बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष बन गईं। उनके मुताबिक पार्टी का आधार पटना से गुजरात के अहमदाबाद में स्थानांतरित किया गया था। हालांकि, अहमदाबाद में पार्टी के रजिस्टर्ड कार्यालय पर पहुंचने पर वहां गतिविधियां दिखाई नहीं दीं। पार्टी के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव ने भी कथित तौर पर कहा कि उन्होंने कामकाज बंद कर दिया था। वहीं पार्टी के अध्यक्ष बताए गए गौरव मिश्रा से संपर्क की कोशिश का जवाब नहीं मिला।
330 करोड़ का चंदा मिला, लेकिन खर्च का पता नहीं
एक अन्य पार्टी को 2023-24 में लगभग 330 करोड़ रुपये का चंदा मिला। पार्टी के रिकॉर्ड के मुताबिक उसने 2024 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार उतारा और चुनाव प्रचार पर लगभग 8.48 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं पार्टी के खातों में करीब 316 करोड़ रुपये का खर्च "जनकल्याण" के नाम पर दर्ज किया गया। पार्टी की अध्यक्ष स्वाति बेन से जब इस खर्च के दस्तावेजों के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि रकम चैरिटी के काम में खर्च की गई, लेकिन उसका रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इतनी बड़ी धनराशि के इस्तेमाल का स्पष्ट रिकॉर्ड राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
4 पार्टियों के कार्यालय गुजरात के एक इलाके में रजिस्टर्ड
जांच के दौरान एक और समानता सामने आई। छह सबसे ज्यादा चंदा हासिल करने वाली RUPP में से चार के रजिस्टर्ड कार्यालय गुजरात के एक ही इलाके में बताए गए। इनमें गरीब कल्याण पार्टी भी शामिल थी, जिसे 2023-24 में करीब 138 करोड़ रुपये का चंदा मिला और जिसने लोकसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारे। लेकिन पार्टी का कार्यालय बंद मिला। पार्टी अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय के घर पर मौजूद उनकी मां ने भी पार्टी की गतिविधियों के बारे में जानकारी होने से इनकार किया।
टैक्स बचाने के लिए हो रहा दुरुपयोग!
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरे मामले को समझने के लिए राजनीतिक दलों को मिलने वाले टैक्स लाभ को देखना जरूरी है। भारत में राजनीतिक दलों की कुछ आय को आयकर से छूट प्राप्त है। इसके अलावा पात्र राजनीतिक चंदे पर दान देने वाले करदाताओं को भी निर्धारित नियमों के तहत टैक्स लाभ मिल सकता है।
इसी व्यवस्था के कथित दुरुपयोग की आशंका लंबे समय से जताई जाती रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में ऐसे राजनीतिक दलों का इस्तेमाल कथित तौर पर दान की रसीद उपलब्ध कराने और उसके बदले नकदी लौटाने जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
विदेशी लेनदेन के भी मिले संकेत
आयकर विभाग ने दिसंबर 2025 में RUPP से जुड़े कथित फर्जी डोनेशन और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख किया था। विभाग के मुताबिक जांच में कुछ ऐसी पार्टियों के इस्तेमाल के संकेत मिले थे जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर फंड ट्रांसफर, हवाला लेनदेन, सीमा-पार धन भेजने और फर्जी चंदे की रसीद जारी करने के लिए किया जा रहा था।
पड़ताल में सामने आए एक आंतरिक दस्तावेज के मुताबिक आयकर विभाग ने ऐसे मामलों में करीब 5,591 करोड़ रुपये के कथित फर्जी राजनीतिक चंदे की पहचान की थी। इनमें से लगभग 2,749 करोड़ रुपये की वसूली किए जाने का दावा किया गया। इसी दस्तावेज में करीब 665 करोड़ रुपये के विदेशी लेनदेन की पहचान का भी उल्लेख था। हालांकि, संबंधित छह पार्टियों के खिलाफ इस कार्रवाई का सीधा संबंध है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इस बारे में संबंधित सरकारी विभागों से पुष्टि मांगी गई है।
पिछले साल 800 से ज्यादा RUPP पर कार्रवाई
चुनाव आयोग ने पिछले साल 800 से ज्यादा RUPP को अपनी सूची से हटाया था। आयोग के मुताबिक इन दलों ने पिछले छह वर्षों में किसी भी चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा था। हालांकि, इन पार्टियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का संबंध वित्तीय अनियमितताओं से था या सिर्फ चुनावी निष्क्रियता से, यह अलग सवाल है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कोई राजनीतिक दल सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा हासिल करता है, तो उसकी वास्तविक राजनीतिक गतिविधियां, संगठनात्मक ढांचा और धन के इस्तेमाल की जानकारी कितनी पारदर्शी होनी चाहिए? विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और उनके खर्च की निगरानी को मजबूत करना जरूरी है, ताकि राजनीतिक चंदे के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किसी अन्य वित्तीय उद्देश्य के लिए न हो सके।