MP में 20 साल बाद फिर लौट रहीं सरकारी बसें: 25 सितंबर से 'सुगम परिवहन सेवा' शुरू करेंगे CM मोहन
मध्य प्रदेश के यात्रियों के लिए बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समिट में सीएम मोहन यादव ने 25 सितंबर 2026 से 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा' शुरू करने की घोषणा की है।

इंदौर विजन समिट से मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान
मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर अब पूरी तरह से बदलने वाली है, क्योंकि 20 साल के लंबे अंतराल के बाद प्रदेश की सड़कों पर एक बार फिर सरकारी बसें दौड़ती नजर आएंगी। इंदौर के मशहूर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि आगामी 25 सितंबर 2026 से पूरे राज्य में 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा' की शुरुआत कर दी जाएगी। सरकार का मुख्य एजेंडा यात्रियों को एक सुरक्षित, आधुनिक, सुविधाजनक और पूरी तरह भरोसेमंद बस सेवा मुहैया कराना है।
55 जिलों का रूट सर्वे पूरा, बिछेगा बसों का जाल
इस नई बस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका विशाल और शानदार नेटवर्क है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में लगभग 5 लाख किलोमीटर का भारी-भरकम सड़क नेटवर्क मौजूद है, जिस पर आसानी से 15 हजार से ज्यादा बसें संचालित की जा सकती हैं। इसी विशाल क्षमता को भुनाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक मजबूत डेटा आधारित रूट प्लान तैयार किया जा रहा है। अब तक प्रदेश के सभी 55 जिलों का रूट सर्वे पूरा किया जा चुका है। नई व्यवस्था के तहत 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट विकसित करने की योजना है।
15 हजार बसों को सड़क पर उतारने का टारगेट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि हमारे पास प्रदेश में करीब 5 लाख किलोमीटर का शानदार सड़क नेटवर्क है और इसमें 15 हजार से अधिक बसें चलाने की भरपूर संभावनाएं छिपी हैं। राज्य सरकार की पूरी कोशिश है कि इस क्षमता का 100% इस्तेमाल किया जाए और आम जनता को सुरक्षित व आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का तोहफा दिया जाए। इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने निजी बस ऑपरेटरों और उद्योग जगत से भी इस व्यवस्था में साझीदार बनने की खुली अपील की है।
20 साल बाद बंद पड़ी सेवा को मिलेगी नई संजीवनी
विजन समिट को संबोधित करते हुए डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जो राज्य परिवहन बस सेवा दशकों से बंद पड़ी थी, उसे अब इस नई व्यवस्था के जरिए एक नई संजीवनी मिलने जा रही है। उन्होंने कहा कि 20 साल में यह 360 डिग्री बदलाव का एक बड़ा अवसर है। 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि बस ऑपरेटरों, बेरोजगार युवाओं और नई तकनीक से जुड़े पेशेवरों के लिए भी रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगी। उनका साफ लक्ष्य मध्य प्रदेश में एक ऐसा शानदार सार्वजनिक परिवहन मॉडल खड़ा करना है, जो पूरे देश के लिए एक नजीर बन सके।
2004-05 में बंद हुई थी सेवा, अब MPYPIL संभालेगा कमान
वहीं, प्रदेश के परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि साल 2004-05 में पुरानी राज्य परिवहन सेवा को बंद कर दिया गया था, लेकिन अब इसे एक बिल्कुल नए और आधुनिक स्वरूप में दोबारा खड़ा किया जा रहा है। हालांकि, यह नई व्यवस्था पुराने पारंपरिक सरकारी बस मॉडल तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें निजी ऑपरेटरों और उद्योग जगत को साथ लेकर PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल अपनाया जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था को संभालने के लिए सरकार ने 'मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (MPYPIL) का गठन किया है, जिसका काम बस संचालन, तकनीकी निगरानी और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ विकसित करना होगा।
GPS, CCTV और पैनिक बटन से लैस होंगी बसें
इस नई परिवहन व्यवस्था में यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और बसों की लाइव निगरानी पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। नई चलने वाली सभी बसों में CCTV कैमरे, GPS ट्रैकिंग, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेंगी। इसके अलावा, यात्रियों को बस की लाइव लोकेशन और समय की जानकारी देने के लिए डिजिटल टिकटिंग और रियल टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम भी लागू किया जाएगा।
गांव से शहर तक जुड़ेगा नेटवर्क, बनेंगे हाईटेक डिपो
इस पूरी योजना का एक बहुत अहम हिस्सा ग्रामीण इलाकों को सीधे शहरों से जोड़ना है। सरकार की योजना के मुताबिक, इस बस सेवा के जरिए ग्रामीण, जिला और अंतरराज्यीय (इंटरस्टेट) कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत किया जाएगा। सिर्फ बसें ही नहीं चलेंगी, बल्कि यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक बस टर्मिनल, शानदार बस स्टैंड, नए डिपो और स्मार्ट बस स्टॉप विकसित करने पर भी युद्धस्तर पर काम किया जाएगा।
ई-बसों और ग्रीन मोबिलिटी से बचेगा पर्यावरण
'सुगम परिवहन सेवा' में पर्यावरण को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक (ई-बस) और CNG बसों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। इस मौके पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दावा करते हुए कहा कि सड़कों पर इन ई-बसों के चलने से हर साल करीब 70 हजार टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सकेगा, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी जीत होगी।
पीथमपुर के प्लांट में बनेंगी हर साल 5 हजार ई-बसें
ई-बसों की जरूरत को पूरा करने के लिए पीथमपुर में एक बड़ा इलेक्ट्रिक बस निर्माण संयंत्र (प्लांट) भी तैयार किया जा रहा है। मशहूर कंपनी 'एका मोबिलिटी' के अनुसार, इस नए प्लांट में हर साल 5 हजार ई-बसें बनाने की क्षमता होगी। इससे न सिर्फ मध्य प्रदेश में बसों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि प्रदेश के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को भी एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा।
20 करोड़ पर्यटकों और 14 करोड़ श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा
सरकार इस नई बस योजना को केवल आम रोजमर्रा के यात्रियों तक ही सीमित नहीं मान रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में हर साल 20 करोड़ से ज्यादा पर्यटक घूमने आते हैं। सिर्फ उज्जैन की बात करें, तो वहां श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल आया है और इस साल वहां करीब 14 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन स्थलों के बीच बेहतरीन बस कनेक्टिविटी की जरूरत काफी बढ़ गई है।
सही बस, सही मार्ग और सही समय का फॉर्मूला
सरकार का दावा है कि इस नई बस सेवा के शुरू होने से न सिर्फ यात्रियों को भारी सुविधा मिलेगी, बल्कि पूरे परिवहन सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा होंगे। इस योजना का असली लक्ष्य सिर्फ सड़कों पर बसों की भीड़ बढ़ाना नहीं है, बल्कि 'सही बस, सही मार्ग और सही समय' के एकदम सटीक फॉर्मूले पर काम करते हुए डेटा और तकनीक से चलने वाला एक बेहतरीन सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क तैयार करना है।

