जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर पाकिस्तान का दबाव, तालिबान ने रखी ऐसी शर्त; बंद होगा दफ्तर?
कंधार में पाकिस्तान और तालिबान के बीच हुई बैठक में जलालाबाद स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की मांग उठी। तालिबान ने इसके बदले पाकिस्तान का वाणिज्य दूतावास भी बंद करने की शर्त रखी। अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।


India Consulate Row in Jalalabad: पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच कंधार में हुई बैठक में भारत से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठा है। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने जलालाबाद में भारत का वाणिज्य दूतावास बंद करने की मांग रखी है। इस पर तालिबान ने जवाब देते हुए कहा कि ऐसा तभी संभव होगा, जब उसी शहर में मौजूद पाकिस्तान का वाणिज्य दूतावास भी बंद किया जाए। यह जानकारी अफगानिस्तान के पूर्व न्याय मंत्री फजल अहमद मानवी ने 30 अक्टूबर को अपने सोशल मीडिया पर दी थी।
कंधार में 22 अक्टूबर को हुई थी बैठक
सूत्रों के अनुसार, 22 अक्टूबर को जनरल इनायत हुसैन के नेतृत्व में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल कंधार पहुंचा था। वहां तालिबान प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। तालिबान की ओर से कंधार के गवर्नर मुल्ला शिरीन, प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद और अन्य अधिकारी शामिल हुए थे।
इस बैठक में पाकिस्तान ने पांच प्रमुख मुद्दे उठाए। इनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के नेताओं को सौंपने, सीमा पार गतिविधियों पर रोक लगाने, पाकिस्तान में तालिबान नेताओं की संपत्तियों की बिक्री, जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास बंद करने और ईरान को भेजी जाने वाली रूसी लॉजिस्टिक मदद से जुड़े आरोप शामिल थे।
भारतीय वाणिज्य दूतावास पर तालिबान की शर्त
फजल अहमद मानवी के मुताबिक, पाकिस्तान ने जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की मांग की थी। इस पर तालिबान की ओर से कहा गया कि वह इस कदम पर तभी सहमत होगा, जब पाकिस्तान भी जलालाबाद स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद करे।
इस जवाब के बाद फिलहाल भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद किए जाने का कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। तालिबान का बताया गया रुख इस मामले को दोनों देशों के बीच आपसी शर्त से जोड़ता है।
TTP नेताओं को सौंपने की मांग पर भी चर्चा
बता दें, बैठक में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के नेताओं को अपने हवाले करने की मांग भी उठाई। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान को कुछ लोगों के ठिकानों से जुड़ी जानकारी भी दी।
तालिबान ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया। इसके बदले उसने पाकिस्तान से अपनी विरोधी ताकतों, खासकर ISIS से जुड़े ठिकानों और प्रशिक्षण केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग रखी। इस मुद्दे पर किसी अंतिम समझौते की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पाकिस्तान में मौजूद संपत्तियों पर भी बनी बात
साथ ही, पाकिस्तान ने वहां मौजूद तालिबान नेताओं की संपत्तियों को बेचने की मांग भी रखी। तालिबान ने इस पर सहमति जताने की बात कही, लेकिन शर्त रखी कि संपत्तियों का भुगतान मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से किया जाए। इन संपत्तियों में मकान, कृषि भूमि और दूसरी अचल संपत्तियां शामिल बताई गई हैं।
ईरान को लेकर पाकिस्तान का प्रस्ताव नहीं माना
वहीं, बैठक में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के रास्ते रूस से ईरान तक लॉजिस्टिक सहायता पहुंचने पर रोक लगाने का मुद्दा भी उठाया। तालिबान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उसने कहा कि उसे ऐसे किसी परिवहन की जानकारी नहीं है और वह क्षेत्रीय संघर्ष में किसी पक्ष का समर्थन करने की नीति नहीं अपना रहा है।
दोनों पक्षों ने चर्चा में उठाए गए मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए एक महीने की समय-सीमा तय की। हालांकि, पाकिस्तान और तालिबान के बीच पहले से चले आ रहे मतभेदों को देखते हुए इन बातों पर अमल होना अभी बाकी है।