25 साल पहले छोड़ी दुनिया, अब 18 करोड़ में बिकी पेंटिंग; जानिए कौन थे गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम?
मध्य प्रदेश के गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम की 1999 की एक कलाकृति मुंबई की पुंडोले गैलरी में 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस पर बिकी। पाटनगढ़ से शुरू हुआ उनका सफर भारत भवन और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक पहुंचा। 2001 में निधन के बाद भी उनकी कला की पहचान लगातार बढ़ती रही।
Painting sold for 18 crores: मध्य प्रदेश के मंडला जिले से ताल्लुक रखने वाले मशहूर गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके निधन के करीब 25 साल बाद उनकी एक कलाकृति ने मुंबई की नीलामी में नया रिकॉर्ड बनाया है। 24 सितंबर 2026 को पुंडोले गैलरी में उनकी 1999 की एक बड़ी ऐक्रेलिक पेंटिंग 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस पर बिकी। इस कलाकृति का अनुमानित मूल्य 4 से 6 करोड़ रुपये रखा गया था।
कौन थे जनगढ़ सिंह श्याम?
बता दें, जनगढ़ सिंह श्याम का जन्म 1962 में मध्य प्रदेश के मंडला जिले के पाटनगढ़ में हुआ था। वह पर्धान गोंड समुदाय से आते थे। इस समुदाय की सांस्कृतिक परंपरा में गीतों के जरिए कहानियों, मिथकों और वंश परंपराओं को आगे बढ़ाने की परंपरा रही है। जनगढ़ ने इसी सांस्कृतिक विरासत को चित्रों के जरिए नई अभिव्यक्ति दी। शुरुआत में वह गांव में मिट्टी की दीवारों पर चित्र बनाया करते थे। उनकी प्रतिभा पर कलाकार और भारत भवन के तत्कालीन निदेशक जे. स्वामीनाथन की नजर पड़ी। इसके बाद उन्हें भोपाल लाया गया, जहां उनकी कला को नया मंच मिला।
भोपाल आने के बाद बदली दुनिया
जानकारी के अनुसार, भोपाल आने के बाद जनगढ़ श्याम ने पारंपरिक गोंड चित्रकला को कागज और कैनवास जैसे माध्यमों पर प्रयोग करना शुरू किया। यहीं से उनकी कला में पारंपरिक प्रतीकों के साथ आधुनिक रंगों और तकनीकों का मेल दिखाई देने लगा।
उनकी चित्र शैली आगे चलकर ‘जांगरह कलम’ के नाम से पहचानी जाने लगी। इसमें बारीक रेखाओं, बिंदुओं, दोहराए जाने वाले पैटर्न और प्राकृतिक आकृतियों का खास इस्तेमाल होता है। पेड़, पक्षी, जानवर, देवी-देवता और आध्यात्मिक आकृतियां उनकी रचनाओं में बार-बार दिखाई देती हैं।
18 करोड़ वाली पेंटिंग में क्या खास है?
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई की पुंडोले गैलरी में 24 सितंबर को नीलाम हुई कलाकृति 1999 की ऐक्रेलिक ऑन कैनवास है। इसका आकार करीब 91×69 इंच है। पेंटिंग में एक पेड़ के बीच आध्यात्मिक आकृति दिखाई देती है। उसके आसपास सांप और पक्षी बनाए गए हैं। इसकी खासियत बड़े आकार के साथ जटिल संरचना और जनगढ़ की अलग-अलग पैटर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल है। नीलामी से पहले इसका अनुमान 4 से 6 करोड़ रुपये लगाया गया था, लेकिन बोली 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस तक पहुंच गई।
एक ही हफ्ते में दो बड़े रिकॉर्ड
दिलचस्प बात यह है कि 18 करोड़ रुपये की यह बिक्री जनगढ़ श्याम के लिए अचानक आया अकेला रिकॉर्ड नहीं है। इससे सिर्फ पांच दिन पहले उनकी एक दूसरी कलाकृति ‘Bel Mukhota (Gond)’ करीब 2.88 करोड़ रुपये में बिकी थी। यह बिक्री 19 सितंबर 2026 को हुई थी। इसके तुरंत बाद 24 सितंबर को पुंडोले में 18 करोड़ रुपये की बिक्री ने उनके पिछले रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया।
भारत भवन से अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक
जनगढ़ श्याम को भोपाल के भारत भवन में काम करने का अवसर मिला। 1990 में उन्होंने भारत भवन के मुख्य गुंबद पर गोंड देवता बड़ादेव से जुड़ी चित्रकारी भी की थी। इसके बाद उनकी कला भारत से बाहर भी पहुंची। उन्हें पेरिस के Centre Pompidou में प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों में भी अपनी कला प्रदर्शित की।
उन्हें 1985 में मिला था शिखर सम्मान
सूत्रों के मुताबिक, जनगढ़ श्याम को 1985 में मध्य प्रदेश का शिखर सम्मान मिला था। यह सम्मान मिलने के समय वह अपने करियर के शुरुआती दौर में थे। बाद के वर्षों में उनकी कला ने देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कला जगत में भी जगह बनाई।
2001 में हुआ निधन
जनगढ़ श्याम का निधन 2001 में हुआ। उस समय उनकी उम्र करीब 39 वर्ष थी। हालांकि, उनके निधन के बाद भी उनकी कला की यात्रा रुकी नहीं। उनकी रचनाएं प्रदर्शनियों, संग्रहों और नीलामियों के जरिए लगातार नए दर्शकों तक पहुंचती रहीं। उनके परिवार और उनसे जुड़े कलाकारों ने भी गोंड कला की इस परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है।


