हाइलाइट्स
- भोपाल में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब, सांस के मरीज तेजी से बढ़े
- अस्पतालों में श्वसन रोगियों की संख्या 20-30% तक बढ़ी
- बच्चे और युवा भी प्रदूषण की चपेट में
- पीएम 2.5 और पीएम 10 कण फेफड़ों के लिए खतरनाक
- निर्माण कार्य, धूल और वाहनों का धुआं बना मुख्य कारण
Bhopal Pollution Report : भोपाल। भोपाल में एयर पॉल्यूशन अब खतरनाक स्तर तक पहुंचता जा रहा है। इसका असर सीधे लोगों की सेहत पर दिख रहा है। हालात यह हैं कि अस्पतालों में पहुंचने वाला हर तीसरा मरीज सांस से जुड़ी समस्या की शिकायत कर रहा है।
चिंता की बात यह है कि यह समस्या अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चे और युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़
शहर के प्रमुख अस्पतालों में श्वसन रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
- AIIMS भोपाल की ओपीडी में करीब 30% तक वृद्धि
- हमीदिया अस्पताल में 25-30% तक मरीज बढ़े
- जेपी अस्पताल में 20-25% मामलों में इजाफा
- BMHRC में भी करीब 25% तक बढ़ोतरी
डॉक्टरों के अनुसार, हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों पर असर डाल रहे हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रखर अग्रवाल का कहना है कि प्रदूषण का असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखता है, लेकिन लंबे समय में यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
उन्होंने बताया कि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और फेफड़ों के संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
Road Accident Bhopal : भोपाल में सड़क पर खुले गड्ढे में गिरी कार, नगर निगम की लापरवाही उजागर
प्रदूषण के पीछे ये बड़े कारण
शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई प्रमुख वजहें सामने आ रही हैं:
- मेट्रो, फ्लाईओवर और सड़क निर्माण जैसे बड़े प्रोजेक्ट
- वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या
- हरियाली में कमी और पेड़ों की कटाई
- निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल
इन कारणों से हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और AQI खतरनाक स्तर के करीब पहुंच रहा है।
प्रशासन का दावा, लेकिन चुनौती बरकरार
किशन सूर्यवंशी ने कहा कि निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट लगाने और पानी का छिड़काव करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति में सतर्क रहना बेहद जरूरी है:
- बाहर निकलते समय मास्क पहनें
- प्रदूषण के समय घर के अंदर रहें
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
- घर के अंदर स्वच्छ हवा बनाए रखें