हाइलाइट्स
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रायसेन किले की तोप को लेकर नया विवाद
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मानवाधिकार आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो ने किया निरीक्षण
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पुरातत्व विभाग NOC नहीं दिखा पाया
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बिना अनुमति तोप चली तो कलेक्टर पर कार्रवाई की चेतावनी
Raisen Fort News : रायसेन। रमजान के दौरान रायसेन किले से दागी जाने वाली तोप को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो किले की पहाड़ी पर पहुंचे और तोप चलाने की व्यवस्था का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने बिना अनुमति तोप चलाने पर कड़ी आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि यदि आवश्यक अनुमति नहीं दिखाई गई तो शाम के बाद तोप चलाने पर कार्रवाई की जाएगी।
पुरातत्व विभाग NOC नहीं दिखा पाया
निरीक्षण के दौरान कानूनगो ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से तोप चलाने के लिए जारी एनओसी (NOC) की कॉपी मांगी। हालांकि मौके पर मौजूद अधिकारी कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर उन्होंने कहा कि बिना अनुमति इस तरह की गतिविधि नियमों के खिलाफ है।
कलेक्टर की अनुमति पर भी उठे सवाल
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि कलेक्टर द्वारा दी गई अनुमति भी नियमों के अनुरूप नहीं लगती। उनके अनुसार कलेक्टर को जिस तरह के हथियारों के लाइसेंस देने का अधिकार है, उसमें 70 एमएम या उससे बड़े तोप के बैरल का लाइसेंस शामिल नहीं है।
इसके लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) से अनुमति लेना जरूरी होता है।
बारूद और सुरक्षा व्यवस्था पर मांगी जानकारी
कानूनगो ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि तोप चलाने में किस तरह के बारूद और केमिकल का उपयोग किया जा रहा है और यह सामग्री कहां से लाई जा रही है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए।
भड़काऊ नारे लगाने की शिकायत
मानवाधिकार आयोग को रायसेन से एक शिकायत भी मिली थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि तोप चलाने के दौरान भड़काऊ नारे लगाए जाते हैं।
हाल ही में कुछ युवकों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें तोप के साथ नारेबाजी दिखाई गई थी। इसके बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
हिंदू संगठनों ने भी उठाई आपत्ति
इस विवाद के बीच रायसेन के कुछ हिंदू संगठनों ने भी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस परंपरा को बंद करने की मांग की है। संगठनों ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए 7 दिन का समय दिया है।
बताया जाता है कि रमजान के दौरान इफ्तार और सेहरी के समय की सूचना देने के लिए रायसेन किले से तोप दागने की परंपरा करीब 200 साल पुरानी है।
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