Pandit Pradeep Mishra fraud : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबेरेश्वर धाम के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा पर झारखंड के गुमला जिले में 36 लाख रुपये की ठगी का गंभीर आरोप लगा है। तपेश्वर महाकाल सेवा ट्रस्ट ने पंडित मिश्रा और उनकी टीम के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कथा आयोजन के नाम पर एडवांस पैसे लेने के बाद वादा पूरा न करने का दावा किया गया है।
ट्रस्ट के सचिव मनोज राम विश्वकर्मा और संजय राम विश्वकर्मा ने परिवाद पत्र में पंडित प्रदीप मिश्रा सहित नौ लोगों को आरोपी बनाया है। मुख्य आरोपी में पंडित मिश्रा के भांजे समीर शुक्ला का नाम प्रमुख है।
शिकायत के अनुसार, ट्रस्ट ने गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित मुरगू गांव में 11 से 17 मई 2025 तक कथा का आयोजन तय किया था। कथा में प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद थी, इसलिए 107 एकड़ जमीन एक महीने के लिए लीज पर ली गई थी।
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ट्रस्ट ने बताया कि कथावाचन और अन्य धार्मिक क्रियाओं के लिए समीर शुक्ला ने 51 लाख रुपये की मांग की। इसमें से 36 लाख रुपये एडवांस के रूप में भुगतान कर दिया गया। लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (झारखंड में नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा अभियान) के कारण कथा स्थगित करनी पड़ी। स्थिति सामान्य होने पर ट्रस्ट ने नई तारीख मांगी, लेकिन आरोपियों ने इनकार कर दिया।
ट्रस्ट सदस्यों ने 15 मई 2025 को सीहोर जाकर पंडित मिश्रा से मुलाकात की। वहां समीर शुक्ला और रंजीता वर्मा ने कहा कि एडवांस जमा है, लेकिन कथा की लिस्ट लंबी है।
जैसे ही कोई तारीख कैंसिल होगी, गुमला के लिए फिक्स कर देंगे लेकिन इसके बाद कोई जवाब नहीं मिला। ट्रस्ट ने पैसे लौटाने की मांग की, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई। इससे नाराज ट्रस्ट ने उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया।
ट्रस्ट के एक सदस्य ने बताया कि कथा आयोजन के लिए भारी खर्चा हो चुका था। जमीन लीज, स्टेज सेटअप और अन्य तैयारी में लाखों रुपये लगे। अब पैसे न मिलने से आर्थिक नुकसान हो रहा है। शिकायत में धोखाधड़ी, अनुबंध उल्लंघन और उपभोक्ता अधिकारों का हनन बताया गया है। आयोग ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पंडित प्रदीप मिश्रा के खिलाफ पहले भी उनके नाम पर फर्जी वेबसाइट और व्हाट्सएप ग्रुप से ठगी के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब सीधे कथा आयोजन से जुड़ा विवाद कोर्ट पहुंचा है। कुबेरेश्वर धाम के प्रबंधन ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।