Raisen News : रायसेन। जून का महीना खत्म होने की ओर है, लेकिन रायसेन जिले के किसानों की नजरें अब भी आसमान पर टिकी हैं। मानसून की दस्तक में हो रही देरी ने खासकर धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में करीब 2.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की तैयारी तो पूरी हो चुकी है, लेकिन ज़रूरत जितनी बारिश नहीं होने से बुवाई और रोपाई का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
खेत तैयार, लेकिन बारिश का इंतजार
मिली जानकारी के अनुसार, जिले के कई गांवों में किसान खेतों की तैयारी पूरी कर चुके हैं। धान की नर्सरी भी तैयार है, लेकिन बारिश की कमी के वजह से रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि धान की खेती पूरी तरह पानी पर निर्भर करती है और समय पर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
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ट्यूबवेल भी नहीं दे रहे पूरा साथ
रायसेन शहर के पास गोपालपुर गांव के किसान सुरेश कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने करीब 20 एकड़ में धान की खेती की तैयारी की है। बारिश की उम्मीद में धान की पौध भी डाल दी गई है, लेकिन अब तक सिंचाई के लिए ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लगातार गर्मी के कारण भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। पहले की मुकाबले अब ट्यूबवेल से भी कम पानी निकल रहा है, जिससे खेती की चिंता और बढ़ गई है।
तीन महीने तक लगातार पानी की जरूरत
किसानों का कहना है कि, करीब चार महीने की फसल होती है और इसमें तीन महीने तक नियमित पानी की जरूरत रहती है। यही वजह है कि जिले के किसान मानसून की पहली अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
देरी हुई तो प्रभावित हो सकती है रोपाई
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती के लिए जून के आखिरी सप्ताह तक अच्छी बारिश होना जरूरी है। यदि मानसून और देर से सक्रिय हुआ तो रोपाई का समय पीछे खिसक सकता है, जिसका असर फसल की पैदावार पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल रायसेन जिले के हजारों किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेत तैयार हैं, बीज तैयार हैं, लेकिन मानसून की देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी को उम्मीद है कि जल्द अच्छी बारिश होगी और खेती का काम रफ्तार पकड़ सकेगा।