Raisen News : रायसेन। गरीबी और कर्ज का ऐसा जाल कि पूरा परिवार सालों-साल बंधुआ मजदूर बनकर रह जाए। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक बार फिर बंधुआ मजदूरी का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। मंगलवार देर रात प्रशासन ने बम्होरी गांव से तीन परिवारों को मुक्त कराया।
ये परिवार रायसेन शहर के पास शाहबुद्दीन नाम के जमींदार के खेत पर पिछले कई सालों से 17-18 घंटे काम करते थे और बदले में मिलते थे सिर्फ 200 रुपये रोज या 6 हजार रुपये महीना। मुक्त हुए मजदूरों में राजू रावत (25), पप्पू आदिवासी और रामकिशन शामिल हैं। तीनों परिवारों की आपबीती सुनकर कोई भी सिहर उठेगा।
राजू रावत ने बताया, “मेरे पिता ने 20 हजार रुपये कर्ज लिया था। उसे चुकाने मैं 7 साल पहले शाहबुद्दीन के यहां काम पर लगा। कर्ज चुकने की बजाय बढ़ता गया। आज डेढ़ लाख रुपये हो गया। 17-18 घंटे काम करते थे। न खाने का ठिकाना, न सोने का। मेरे एक साल के बच्चे की तबीयत खराब हुई तो मालिक ने अस्पताल जाने तक नहीं दिया। बोला – काम छोड़कर कहां जाएगा?”
रामकिशन विदिशा के शमशाबाद का रहने वाला है। काम की तलाश में ससुराल आया था। 6 हजार रुपये महीने की पगार पर काम शुरू किया। एक साल बाद उस पर एक लाख रुपये का कर्ज हो गया। अब वह भी बंधुआ बन चुका था।
पप्पू आदिवासी पहले ड्राइवर था। बीमारी के कारण नौकरी चली गई। फिर खेतों में काम शुरू किया। एक के बाद एक मालिक बदलता गया, कर्ज बढ़ता गया। शाहबुद्दीन के यहां उसका कर्ज 60 हजार रुपये तक पहुंच चुका था। पत्नी और दो बेटों के साथ खेत पर बने एक कमरे में रहते थे। पप्पू ने बताया, “न दिन की चिंता खत्म होती थी, न रात की नींद पूरी।”
रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार रात को हुआ। प्रशासन की टीम ने तीनों परिवारों को मुक्त कराया, मेडिकल करवाया और घर भेजा। बुधवार को नायब तहसीलदार अमृता सुमन ने उनका बयान दर्ज किया।
यह रिपोर्ट तहसीलदार और एसडीएम को भेजी जाएगी। उसके बाद शाहबुद्दीन के खिलाफ बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
यह पहला मामला नहीं है। गरीबी, बेरोजगारी और सिस्टम की लापरवाही की वजह से आज भी कई परिवार कर्ज के जाल में फंसकर बंधुआ बन जाते हैं। दस्तावेज पूरे न होने से सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता। प्रशासन अब इन परिवारों को पुनर्वास, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और अन्य योजनाओं से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।