MP News : भोपाल। देश में आयुर्वेद की शिक्षा और चिकित्सा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में विशेषज्ञों ने बड़ा सुझाव दिया है। भोपाल समेत जोधपुर, वाराणसी, पटना, रायपुर, नई दिल्ली और देहरादून जैसे शहरों में चल रहे आयुर्वेद कॉलेजों की चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि देश के 565 से अधिक बीएएमएस कॉलेजों में से 161 पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेजों में रिसर्च कार्य तो हो रहा है, लेकिन प्रमाणिकता और औषधि निर्माण की प्रक्रिया अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रही।
ज्यादातर कॉलेज मरीजों को जरूरी दवाओं का 50 फीसदी भी खुद नहीं बना पाते। इस मुद्दे पर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ आयुर्वेद हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर भोपाल के प्रिंसिपल और आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आयुष मंत्रालय से अपील की कि ‘वन नेशन, वन कॉलेज, वन रिसर्च’ नीति को सख्ती से लागू किया जाए।
डॉ. राकेश पाण्डेय ने कहा कि नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) के माध्यम से हर पीजी कॉलेज को आदेश दिया जाए कि तीन साल में कम से कम एक गंभीर बीमारी पर रिसर्च पूरा कर सकारात्मक परिणाम दे और इसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर शेयर करे।
सिर्फ डिग्री देना आयुर्वेद के साथ अन्याय है। मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों में हजारों दुर्लभ वनस्पतियां हैं, जो रिसर्च में काम आ सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि, वर्तमान में 565 मान्यता प्राप्त यूजी कॉलेजों में से 161 पीजी कॉलेजों में करीब 5097 एमडी-एमएस सीटें हैं। इनमें 15 हजार से ज्यादा शोधार्थी पढ़ रहे हैं। देशभर में एक हजार से अधिक डॉक्टर पीएचडी कर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और एम्स जैसे संस्थानों में आयुर्वेद पर संयुक्त रिसर्च हो रहे हैं, लेकिन क्रॉनिक बीमारियों में भी 100 फीसदी सफलता नहीं मिल पा रही। पेन मैनेजमेंट पर भी ठोस परिणामों का इंतजार है।
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हर पीजी कॉलेज को मधुमेह, आमवात, मोटापा, हृदय रोग, कैंसर, अस्थमा, सोरायसिस, उच्च रक्तचाप, क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस, धातु रोग, पुरानी सर्दी, एनीमिया, दमा, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, त्वचा रोग, स्त्री रोग, आंतों और लिवर की बीमारियों में से किसी एक पर हर तीन साल में रिसर्च करनी चाहिए। एनसीआईएसएम और आयुष मंत्रालय अगर सख्ती करेंगे तो 15 हजार पीजी छात्र हर साल सकारात्मक परिणाम दे सकेंगे।
मंत्रालय को रिसर्च के लिए आर्थिक मदद आसानी से उपलब्ध करानी चाहिए। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आयुर्वेद के प्रति सकारात्मक हैं, लेकिन राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवाओं की विश्वसनीयता बढ़ानी जरूरी है। उम्मीद है कि ‘वन कॉलेज-वन रिसर्च’ पर मंत्रालय प्रैक्टिकल कदम उठाएगा।
राज्यों में पीजी सीटें:
ईडब्ल्यूएस कोटा हटने के बाद मध्यप्रदेश में शासकीय-निजी मिलाकर 8 पीजी कॉलेजों में 192 सीटें, राजस्थान में 4 कॉलेजों में 267 सीटें और उत्तरप्रदेश में 14 कॉलेजों में 280 सीटें हैं।
देशभर में आयुर्वेद कॉलेजों की संख्या 598 तक पहुंच चुकी है, जिनमें 42 हजार से ज्यादा यूजी सीटें हैं। एनसीआईएसएम ने 2025-26 सत्र के लिए कई कॉलेजों को मान्यता दी है, लेकिन रिसर्च की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस नहीं है।