MYH Rat Bites : इंदौर, मध्य प्रदेश। इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के हमले से दो नवजात बच्चियों की मौत का मामला अब नई मोड़ ले चुका है। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के सीईओ और जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. योगेश भरसट ने दैनिक भास्कर को बताया कि विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। गोपनीय रिपोर्ट संभागायुक्त को सौंपी गई है। इसमें एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और अस्पताल प्रभारी डॉ. अशोक यादव को मुख्य रूप से दोषी ठहराया गया है।
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यह घटना सितंबर 2025 में घटी थी। अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती दो मासूमों को चूहों ने काट लिया। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन ने मौत का कारण संक्रमण बताया। लेकिन जांच से साफ हुआ कि पेस्ट कंट्रोल की लापरवाही ही असली वजह थी। डॉ. भरसट ने कहा कि रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हैं। संभागायुक्त ही पूरी डिटेल बता सकेंगे।
जांच के मुख्य निष्कर्ष
रिपोर्ट में पाया गया कि अस्पताल की सफाई और पेस्ट कंट्रोल की पूरी जिम्मेदारी डीन और अधीक्षक पर थी। आउटसोर्स कंपनी एजाइल के काम की निगरानी और भुगतान का दायित्व भी इन्हीं का था। लेकिन दोनों ने जांच टीम को दस्तावेज ही नहीं सौंपे। नोटशीट और भुगतान रिकॉर्ड गायब थे। सवाल उठता है कि डीन ने ऐसा क्यों किया?
बार-बार रिमाइंडर के बावजूद पेस्ट कंट्रोल नहीं हुआ। कंपनी ने कागजों पर काम दिखाया, लेकिन बिना जांच के करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। इंचार्ज सिस्टर ने 7 जनवरी 2025 को ही चूहों की शिकायत पर पत्र लिखा था। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कंपनी मैनेजर प्रदीप रघुवंशी के बयान से पता चला कि पेस्ट कंट्रोल ठीक से नहीं किया गया।
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घटना के बाद भी कर्मचारियों के फोन पर कंपनी ने जवाब नहीं दिया। पहली बच्ची के मामले में तुरंत एक्शन लेते तो दूसरी मौत रोकी जा सकती थी। वरिष्ठ डॉक्टरों ने समय पर जांच नहीं की। सिर्फ रेजिडेंट डॉक्टरों ने देखा। सिस्टर ने बताया कि वेंटिलेटर के रिकॉर्ड भी छिपाए गए। अगर ये सामने आते तो और लापरवाही उजागर होती।
रिपोर्ट कहती है कि प्रबंधन पूरी तरह विफल रहा। डीन और अधीक्षक ने सही जानकारी समय पर नहीं दी। हाईकोर्ट ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। 15 सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी।